कभी-कभी एक छोटी सी घटना इतनी बड़ी कहानी खोल देती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। श्योपुर में हाईवे किनारे मिली एक मासूम बच्ची ने भी कुछ ऐसा ही किया। जो बच्ची लावारिश हालत में मिली थी, वही बच्चा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का राज खोलने की वजह बन गई।
पहली नजर में यह मामला एक सामान्य घटना लग सकता था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, हर दिन एक नया खुलासा सामने आता गया। पुलिस की मेहनत ने आखिरकार उस सच्चाई को सामने ला दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि एक सरकारी अस्पताल की नर्स निकली।
हाईवे पर मिली बच्ची से खुला बच्चा तस्करी रैकेट
श्योपुर बच्चा तस्करी मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब सवाई माधोपुर नेशनल हाईवे के पास एक ढाबे के करीब दो साल की बच्ची लावारिश हालत में मिली। बच्ची अकेली थी, डरी हुई थी और उसे देखकर साफ लग रहा था कि कुछ गलत हुआ है।
ढाबा संचालक सोनू आर्य ने इंसानियत दिखाते हुए बच्ची को सुरक्षित थाने पहुंचाया। यही वह पहला कदम था, जिसने इस पूरे बच्चा तस्करी नेटवर्क की परतें खोलने का रास्ता बनाया। पुलिस ने जैसे ही जांच शुरू की, यह साफ हो गया कि मामला साधारण नहीं है। बच्ची का यहां होना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा था।
100 से ज्यादा सीसीटीवी और भोपाल तक पहुंची जांच
श्योपुर बच्चा तस्करी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीम बनाई। जांच के दौरान 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
हर फुटेज एक सुराग बनती गई और जांच की कड़ी धीरे-धीरे भोपाल तक पहुंच गई। आखिरकार पुलिस ने उस दंपती को गिरफ्तार कर लिया, जिसने बच्ची को हाईवे पर छोड़ दिया था। पूछताछ में दंपती ने जो बताया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने बच्ची को खरीदा था और बाद में उसे छोड़ दिया।
सरकारी नर्स निकली मास्टरमाइंड
श्योपुर बच्चा तस्करी मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने इस नेटवर्क की असली सूत्रधार तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाली हेड नर्स है। आरोप है कि उसने एक गरीब परिवार की मजबूरी का फायदा उठाया और बच्ची को बेच दिया।
करीब दो साल पहले, जब बच्ची सिर्फ 6 दिन की थी, तब उसे सौदे के तहत बेचा गया। इस सौदे में कई लोग शामिल थे, जिनमें एक ब्यूटी पार्लर संचालिका भी थी, जिसने बच्ची को आगे भोपाल के दंपती तक पहुंचाया।
16 दिन की जांच में 7 आरोपी गिरफ्तार
श्योपुर बच्चा तस्करी मामले में पुलिस ने 16 दिनों तक लगातार मेहनत की। इस दौरान कई शहरों में दबिश दी गई। खरगोन, धार, इंदौर और भोपाल में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं।
यह कार्रवाई बच्चा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए जांच अभी भी जारी है।
असली माता-पिता तक पहुंची पुलिस, डीएनए टेस्ट होगा
श्योपुर बच्चा तस्करी मामले में एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। पुलिस ने 16 दिनों की जांच के बाद बच्ची के असली माता-पिता को खोज निकाला है।
अब बच्ची और माता-पिता का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, ताकि पूरी तरह पुष्टि हो सके। अगर रिपोर्ट मैच होती है, तो कानूनी प्रक्रिया के बाद बच्ची को उसके असली परिवार को सौंप दिया जाएगा।






