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शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: करोड़ों की खरीदी कागजों में निपटी, सिंगरौली डीईओ समेत कई अफसरों पर एफआईआर

Reported by:Raghvendra Singh Gaharwar|Edited by:Atul Saxena
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इस पूरे घोटाले में जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि जिले की जिम्मेदारी उन्हीं के कन्धों पर है , अब लोकायुक्त पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामला जाँच में लिया है, कहा जा रहा है कि अभी कई परतें और खुलेंगी।
शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: करोड़ों की खरीदी कागजों में निपटी, सिंगरौली डीईओ समेत कई अफसरों पर एफआईआर

सिंगरौली में शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की खरीदी को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। रीवा लोकायुक्त की जांच में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) समेत कई जिम्मेदार अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। शुरुआती जांच में ही वित्तीय अनियमितताओं के ठोस संकेत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाले डीईओ की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। आरोप है कि करोड़ों के भुगतान के बावजूद न गुणवत्ता की जांच की गई और न ही खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह महज लापरवाही है या फिर सुनियोजित मिलीभगत?

इन अफसरों पर दर्ज हुआ मामला

लोकायुक्त पुलिस ने डीईओ सूर्यभान सिंह, सहायक संचालक राजधर साकेत, जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल, सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) छविलाल सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है।

करोड़ों की खरीदी, लेकिन प्रक्रिया “गायब”

जांच में सामने आया कि विभाग ने अलग-अलग मदों में भारी भरकम खर्च किया, लेकिन नियमों की खुली अनदेखी की गई।

  • 558 स्कूलों में स्वच्छता व कीटाणुशोधन सामग्री पर ₹97.67 लाख
  • 19 स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी (VR) लैब के नाम पर करीब ₹4.68 करोड़
  • 61 स्कूलों में बिजली, उपकरण और मरम्मत पर ₹3.05 करोड़

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि इन खरीदारियों में टेंडर प्रक्रिया, स्वीकृति और भुगतान के नियमों का पालन नहीं किया गया। कई मामलों में सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल हैं।

15 अप्रैल को छापा, अहम दस्तावेज जब्त

15 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त टीम ने डीईओ कार्यालय पहुंचकर टेंडर फाइलें, स्वीकृति आदेश, बिल और भुगतान से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। अब इन्हीं दस्तावेजों के जरिए पूरे वित्तीय लेनदेन की परत-दर-परत जांच की जा रही है।

ये कहना है लोकायुक्त एसपी का 

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने जब इस घोटाले को लेकर लोकायुक्त एसपी रीवा सुनील पाटीदार से बात की तो उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में ही कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं और जांच अभी जारी है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

बड़ा सवाल, करोड़ों रुपये की रकम कहाँ गई? 

बहरहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि शिक्षा के नाम पर खर्च हुई यह मोटी रकम आखिर बच्चों तक पहुंची भी या नहीं? अगर नहीं, तो जिम्मेदार कौन, सिस्टम की लापरवाही या अफसरों की मिलीभगत? फिलहाल, पूरे जिले की नजर इस जांच पर टिकी है क्योंकि यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख का है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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