कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है। दरअसल पहली नजर में यह आंकड़ा 2022 के मुकाबले कम लग सकता है, लेकिन इस बार खेलों की संख्या और भारतीय दल दोनों छोटे थे। वहीं इसके बावजूद भारत का मेडल कन्वर्जन रेट बेहतर रहा, जो टीम के मजबूत प्रदर्शन की कहानी बताता है।
दरअसल भारत ने इस बार ग्लासगो में 123 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि बर्मिंघम 2022 में 210 खिलाड़ी शामिल थे। सबसे खास बात यह रही कि 123 खिलाड़ियों में से 38 खिलाड़ी मेडल जीतने में सफल रहे। यानी लगभग 31 प्रतिशत खिलाड़ियों ने पदक हासिल किया, जो पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। इस बार कई ऐसे खेल कार्यक्रम शामिल नहीं थे, जिनमें भारत परंपरागत रूप से ज्यादा मेडल जीतता रहा है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने कई नए रिकॉर्ड बनाए और उम्मीद से ज्यादा गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
बॉक्सिंग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
वहीं इस बार भारत के लिए सबसे सफल खेल बॉक्सिंग रहा है। दरअसल भारतीय मुक्केबाजों ने 7 गोल्ड और 3 सिल्वर समेत कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार भारत ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में सात बॉक्सिंग गोल्ड जीते। इससे साफ हो गया कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारतीय बॉक्सिंग टीम मजबूत दावेदार रहेगी। इसके अलावा वेटलिफ्टिंग से 8, एथलेटिक्स से 10, पैरा एथलेटिक्स से 6, जूडो से 4 और पैरा पावरलिफ्टिंग से 1 पदक मिला। जूडो में भी भारत ने नया इतिहास बनाया, जहां अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने गोल्ड जीतकर इस खेल में देश की नई पहचान बनाई। पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सीमित खिलाड़ियों के बावजूद कई पदक जीते। कुल मिलाकर भारत के 39 में से 37 पदक सिर्फ पांच खेलों से आए, जिससे साफ है कि इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।
एथलेटिक्स में गोल्ड की कमी
हालांकि एथलेटिक्स में भारत को सबसे ज्यादा निराशा गोल्ड मेडल नहीं मिलने से हुई। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 10 पदक जरूर जीते, लेकिन कोई भी खिलाड़ी स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका। नीरज चोपड़ा सिल्वर तक सीमित रहे, जबकि यशवीर सिंह, गुलवीर सिंह, तेजस्विन शंकर और अन्य खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत की झोली भरी। वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने 8 पदक जीते, लेकिन केवल मीराबाई चानू गोल्ड जीत सकीं। दूसरी ओर लॉन बॉल्स, जिम्नास्टिक्स, स्विमिंग और साइक्लिंग जैसे खेलों में भारत को पदक नहीं मिला। इसके बावजूद कई युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से भविष्य की उम्मीदें बढ़ाई हैं।






