इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए concussion substitute रूल में बड़ा बदलाव कर दिया है। दरअसल नए नियम के मुताबिक, अगर किसी खिलाड़ी को सिर या गर्दन में गेंद लगती है और वह कनकशन के लक्षण दिखाता है, तो उसे मैच से हटाने के बाद कम से कम 7 दिन तक मैदान से बाहर रहना होगा। पहले ऐसा होता था कि खिलाड़ी 2-3 दिन के भीतर ही अगला मैच खेल लेता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

दरअसल इस कदम का मकसद खिलाड़ियों को पर्याप्त रिकवरी टाइम देना है ताकि वे पूरी तरह ठीक होकर ही दोबारा मैदान में उतरें। खास बात यह है कि यह नियम केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरेलू और अन्य मान्यता प्राप्त टूर्नामेंट्स में भी लागू होगा।

क्रिकेट का यह रूल क्या है?

दरअसल WTC के नए चक्र के साथ लागू किए गए इस नियम के तहत अगर किसी खिलाड़ी को मैच के दौरान सिर पर चोट लगती है और टीम उसकी जगह किसी और खिलाड़ी को सब्स्टीट्यूट करती है, तो चोटिल खिलाड़ी अगले कम से कम 7 दिनों तक किसी भी फॉर्मेट में हिस्सा नहीं ले सकेगा। यह नियम उन परिस्थितियों को रोकने के लिए लाया गया है, जब टीमें कनकशन का बहाना बनाकर मजबूत खिलाड़ी को बीच मैच में बदले की रणनीति के तहत बाहर कर देती थीं। ऐसे कई उदाहरण देखे गए हैं जब टीमों ने इस नियम का फायदा उठाकर प्लेइंग XI को मजबूती देने की कोशिश की। अब ICC ने यह loophole बंद कर दिया है।

खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर ICC की सख्ती बढ़ी

वहीं इसके साथ ही अब हर टीम को मैच से पहले 5 कनकशन सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों की लिस्ट देनी होगी। इसमें एक बल्लेबाज़, एक विकेटकीपर, एक तेज गेंदबाज़, एक स्पिनर और एक ऑलराउंडर शामिल होना अनिवार्य है। इससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और विवाद से बचा जा सकेगा। दरअसल ICC द्वारा concussion नियम में बदलाव की मुख्य वजह खिलाड़ियों की सुरक्षा रही है। वहीं खासकर तब से जब ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर फिल ह्यूज की सिर पर बाउंसर लगने से दुखद मौत हुई थी। उसके बाद क्रिकेट जगत में हेलमेट की सुरक्षा से लेकर concussion substitute तक कई नए कदम उठाए गए हैं।