भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत इस समय खूब चर्चा में हैं। दरअसल, वे इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में अपने शानदार प्रदर्शन से तो चर्चा बटोर ही रहे हैं, लेकिन इसके अलावा भी एक और विषय है, जिसके कारण वह सुर्खियों में हैं। दरअसल, हाल ही में उन्होंने कर्नाटक की एक मेधावी छात्रा की फीस भरकर कॉलेज में एडमिशन दिलाने में मदद की है। इस काम से ऋषभ पंत ने अब लोगों का दिल जीत लिया है।

पहले इंग्लैंड दौरे पर ऋषभ पंत ने चोटिल हो जाने के बावजूद अपने देश के लिए खेलने का जज्बा दिखाया और शानदार प्रदर्शन किया, तो वहीं अब उन्होंने इस छात्रा की फीस भरकर उसे कॉलेज में एडमिशन दिलाने का काम कर लोगों के दिल में और भी जगह बना ली है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल, बिलागी तालुक के रबाकवी गांव की रहने वाली ज्योति कनबूर, जो कि 12वीं कक्षा में 83% अंकों के साथ पास हुई थीं, कॉलेज में एडमिशन की तलाश कर रही थीं। लेकिन ज्योति की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। परिवार की आर्थिक तंगी एडमिशन के लिए बड़ी बाधा बन गई, जिसके कारण कॉलेज में दाखिले के लिए उन्हें अत्यधिक संघर्ष करना पड़ा। उनके पिता तीर्थयया गांव में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं। दुकान इतनी ज्यादा नहीं चलती कि वह बेटी की शिक्षा का खर्च उठा सकें। परेशानी के चलते उन्होंने गांव के एक स्थानीय ठेकेदार अनिल हुनाशिकट्टी से संपर्क किया।

ऋषभ पंत ने जीता दिल

उन्होंने ज्योति को वादा किया कि वह बीएलडीई कॉलेज में उसका दाखिला करवाने में मदद करेंगे। हुनाशिकट्टी ने बेंगलुरु में अपने दोस्तों से इसे लेकर संपर्क किया। दरअसल, उनके दोस्त ऋषभ पंत के बेहद करीबी हैं। जब उन्होंने ज्योति की परेशानी उन्हें बताई, तो दोस्तों ने यह बात ऋषभ पंत तक पहुंचा दी। ऋषभ पंत को जब इस बात की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत ही मदद के लिए हाथ बढ़ा दिया। उन्होंने 17 जुलाई को ज्योति की पहले सेमेस्टर की फीस के लिए ₹40,000 सीधे कॉलेज के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए।

ज्योति ने ऋषभ पंत को थैंक्यू कहा

इसे लेकर ज्योति ने ऋषभ पंत का धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं बीसीए करने का सपना देखती थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मेरी स्थिति से ऋषभ पंत को अनिल हुनाशिकट्टी ने अवगत कराया, तो उन्होंने मेरी मदद की। भगवान ऋषभ पंत को अच्छी सेहत दे। यह मदद मेरे लिए बहुत मायने रखती है। मैं उम्मीद करती हूं कि ऋषभ पंत आगे भी मेरे जैसे गरीब पृष्ठभूमि के बाकी छात्रों को भी समर्थन देते रहेंगे।