Hindi News

टी20 वर्ल्ड कप 2026 ट्रॉफी विवाद पर गौतम गंभीर का कीर्ति आजाद पर पलटवार, जानिए क्या कहा?

Written by:Rishabh Namdev
Published:
टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीत के बाद ट्रॉफी के साथ मंदिर जाने पर शुरू हुए विवाद में हेड कोच गौतम गंभीर ने कीर्ति आजाद को कड़ा जवाब दिया है। गंभीर ने कहा कि ऐसे बयान 15 खिलाड़ियों की मेहनत और दबाव में हासिल की गई जीत को छोटा करते हैं। कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को 1.4 अरब भारतीयों की संपत्ति बताते हुए पूछा था कि इसे सिर्फ मंदिर ही क्यों ले जाया गया।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 ट्रॉफी विवाद पर गौतम गंभीर का कीर्ति आजाद पर पलटवार, जानिए क्या कहा?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल के बाद शुरू हुआ ट्रॉफी विवाद अब खुली बयानबाजी तक पहुंच गया है। भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने पूर्व क्रिकेटर और नेता कीर्ति आजाद की आलोचना का सीधे जवाब देते हुए कहा कि इस वक्त देश को जीत का जश्न मनाना चाहिए, न कि खिलाड़ियों की उपलब्धि को बहस में धकेलना चाहिए।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारत की खिताबी जीत के बाद गंभीर, कप्तान सूर्यकुमार यादव और जय शाह ट्रॉफी के साथ एक हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। इसी पर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ट्रॉफी 1.4 अरब भारतीयों की है, इसलिए जश्न किसी एक धर्म तक सीमित नहीं दिखना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि ट्रॉफी मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे क्यों नहीं ले जाई गई।

पोस्ट सामने आते ही बहस दो हिस्सों में बंट गई। एक पक्ष ने इसे धार्मिक संतुलन का सवाल बताया, दूसरे ने कहा कि जीत के बाद खिलाड़ी और टीम अपने तरीके से आभार जताएं तो उसे विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।

गंभीर ने कहा: जवाब देना भी जरूरी नहीं, पर बात साफ होनी चाहिए

गौतम गंभीर ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे सवालों का जवाब देना भी जरूरी नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह पूरे देश का बड़ा पल है। उनके मुताबिक, टीम की ऐतिहासिक जीत के मौके पर इस तरह की टिप्पणी खिलाड़ियों की मेहनत को पीछे धकेल देती है।

गंभीर का संदेश साफ था: अगर 15 खिलाड़ियों की मेहनत को कमतर दिखाने की शुरुआत हो गई, तो फिर कोई भी कुछ भी कह देगा और असली कहानी खो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ी सिर्फ मैदान में रन या विकेट से नहीं लड़ते, वे लंबे दबाव, आलोचना और मानसिक थकान से भी गुजरते हैं।

गंभीर ने साउथ अफ्रीका से हार के बाद का संदर्भ भी याद दिलाया। उनका कहना था कि उस हार के बाद टीम पर बाहरी और अंदरूनी, दोनों तरह का दबाव था। ऐसे समय से निकलकर खिताब जीतना आसान नहीं होता। इसलिए जीत के बाद दिए जाने वाले बयान भी उतनी ही जिम्मेदारी से होने चाहिए जितनी जिम्मेदारी खिलाड़ी मैदान पर निभाते हैं।

हार, दबाव, वापसी और फिर 96 रन की जीत

भारत का यह खिताबी सफर सीधा नहीं था। सुपर-8 चरण में साउथ अफ्रीका से हार ने टीम पर सवालों का बोझ बढ़ा दिया था। उस दौर में टीम संयम खोती तो टूर्नामेंट वहीं से हाथ से निकल सकता था।

लेकिन भारत ने वापसी की। जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया। सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराया और फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से मात देकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। यह सिर्फ एक जीत नहीं रही, रिकॉर्ड में दर्ज होने वाला नतीजा बनी, क्योंकि भारत टी20 वर्ल्ड कप तीन बार जीतने वाली पहली टीम बन गया।

यही वह संदर्भ है जिसे गंभीर बार-बार सामने ला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब टीम इतनी मुश्किल राह पार करके ट्रॉफी तक पहुंची है, तब जश्न के एक दृश्य को पूरी उपलब्धि पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

कीर्ति आजाद की आपत्ति भी साफ है और सार्वजनिक है: राष्ट्रीय ट्रॉफी का प्रतीकात्मक इस्तेमाल सभी धर्मों की साझी भावना को दिखाए। इसीलिए यह बहस सिर्फ एक मंदिर यात्रा तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय टीम, सार्वजनिक प्रतीक और निजी आस्था के संतुलन तक पहुंच गई।

फिलहाल तस्वीर दो लाइन में समझिए: मैदान पर भारत चैंपियन है, और मैदान के बाहर जश्न के तरीके पर बहस जारी है। रिकॉर्ड बुक में 96 रन की जीत दर्ज हो चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह चर्चा अभी थमी नहीं है।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
Follow Us :GoogleNews