क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, जहाँ रिकॉर्ड बनते और टूटते हैं। लेकिन कभी-कभी मैदान पर ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जो दशकों तक याद रखी जाती हैं। ऐसी ही दो अनोखी घटनाएं श्रीलंका के दो बल्लेबाजों के साथ हुईं, जिन्हें बिना एक भी गेंद खेले पवेलियन लौटना पड़ा। यह दोनों ही मामले क्रिकेट नियमों की पेचीदगियों को दर्शाते हैं।
एक मामला 2023 के वनडे विश्व कप का है, जब अनुभवी श्रीलंकाई ऑलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर पहुंचे। लेकिन इससे पहले कि वह एक भी गेंद का सामना कर पाते, उनके हेलमेट का स्ट्रैप टूट गया। उन्होंने दूसरा हेलमेट मंगवाया, लेकिन इस प्रक्रिया में निर्धारित समय से कुछ सेकंड ज्यादा लग गए।
विरोधी टीम ने मौके का फायदा उठाते हुए अंपायर से अपील कर दी। क्रिकेट के नियमों के तहत, अंपायर ने मैथ्यूज को “टाइम्ड आउट” करार दिया। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण था, क्योंकि इससे पहले किसी भी बल्लेबाज को इस नियम के तहत आउट नहीं दिया गया था। मैथ्यूज बिना खाता खोले और बिना कोई गेंद खेले वापस लौट गए।
मारवन अट्टापट्टू का अनोखा विकेट
एंजेलो मैथ्यूज से करीब 22 साल पहले, एक और श्रीलंकाई दिग्गज इसी तरह की अजीबोगरीब स्थिति का शिकार हो चुके हैं। साल 2001 में, पूर्व कप्तान मारवन अट्टापट्टू बल्लेबाजी करने उतरे। खेल के दौरान गेंद लुढ़ककर उनके पास आई और उन्होंने सहजता से उसे उठाकर फील्डर की तरफ फेंक दिया।
हालांकि, यह एक सद्भावनापूर्ण इशारा था, लेकिन क्रिकेट के नियमों के अनुसार यह गलत था क्योंकि गेंद उस समय ‘डेड’ नहीं हुई थी। विपक्षी टीम ने तुरंत अपील की और अंपायर ने उन्हें “हैंडलिंग द बॉल” नियम के तहत आउट दे दिया। अट्टापट्टू भी उस दिन बिना कोई गेंद खेले शून्य पर पवेलियन लौट गए थे।
एक देश, दो अजीबोगरीब रिकॉर्ड
यह एक दुर्लभ संयोग है कि क्रिकेट इतिहास के दो सबसे अजीबोगरीब डिस्मिसल, जहाँ बल्लेबाज ने एक भी गेंद नहीं खेली, दोनों ही श्रीलंका के खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं। दो अलग-अलग दशक, दो अलग-अलग नियम, और दो अलग-अलग परिस्थितियां, लेकिन नतीजा एक जैसा रहा। इन घटनाओं ने न केवल क्रिकेट प्रशंसकों को हैरान किया, बल्कि खेल के नियमों पर भी एक नई बहस छेड़ दी। यही वजह है कि आज भी इन दोनों वाकयों को क्रिकेट की सबसे अविश्वसनीय घटनाओं में गिना जाता है।






