सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन के मंदिरों के विकास के लिए टेम्पल बॉन्ड के जरिए 1124 करोड़ रुपए जुटाने की योजना को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। दरअसल जिला युवा कांग्रेस मंगलवार शाम 5 बजे शहीद पार्क पर प्रदर्शन करेगी। संगठन ने मंदिरों को निजी हाथों में सौंपे जाने या बेचे जाने की आशंका जताते हुए सरकार से योजना की असलियत साफ करने की मांग की है। हालांकि मंदिरों को बेचने का दावा फिलहाल कांग्रेस नेताओं की आशंका के तौर पर सामने आया है।
इसी मुद्दे को लेकर जिला युवा कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि सरकार को इस योजना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि मंदिरों के विकास के लिए किस तरह की व्यवस्था प्रस्तावित है।
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शहीद पार्क पर जुटेंगे युवा कांग्रेस कार्यकर्ता
वहीं जिला युवा कांग्रेस का प्रदर्शन मंगलवार शाम 5 बजे उज्जैन के शहीद पार्क पर होगा। युवा कांग्रेस नेता अर्पित यादव ने बताया कि धार्मिक नगरी के प्रसिद्ध मंदिरों को लेकर सामने आ रही खबरों के विरोध में संगठन ने प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। उन्होंने जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, ब्लॉक अध्यक्षों, विधानसभा अध्यक्षों और युवाओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। कांग्रेस नेताओं ने मंदिरों से जुड़े फैसलों को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मंदिरों के विकास के नाम पर प्रस्तावित वित्तीय योजना की पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए। संगठन ने मंदिरों को निजी हाथों में सौंपे जाने या बेचे जाने की आशंका भी जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मंदिरों को बेचने या उनका मालिकाना हक निजी हाथों में देने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
सिंहस्थ 2028 से पहले इन 11 मंदिरों के विकास की योजना
दरअसल टेम्पल बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने की प्रस्तावित योजना में उज्जैन के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सिद्धवट, सांदीपनि आश्रम, गढ़ कालिका मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर, शनि मंदिर या नवग्रह मंदिर, भूखी माता मंदिर और 84 महादेव श्रृंखला के मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर का नाम भी इस सूची में है। सिंहस्थ 2028 से पहले इन धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने की योजना का मकसद श्रद्धालुओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास कार्य करना बताया जा रहा है।
