महाकाल महालोक उज्जैन के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। बाबा महाकालेश्वर के दर्शन करने आने वाले भक्त महाकाल लोक का दीदार जरूर करते हैं। यहां शिव की अलग अलग लीलाओं से जुड़ी प्रतिमाएं मौजूद है। अब आने वाले श्रद्धालुओं को नई प्रतिमाएं भी देखने को मिलेगी।
दरअसल, यहां मौजूद प्रतिमाओं के स्थान पर अब श्रद्धालुओं को पत्थर और मेटल से बनी नई प्रतिमाएं देखने को मिलेगी। इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है। प्रशासन 92 नई मूर्तियां बनवा रहा है। इनमें से 35 पत्थर और 57 मेटल की प्रतिमाएं हैं।
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मूर्तियों का चल रहा निर्माण
अलग अलग जगहों से आए कारीगर इन प्रतिमाओं के निर्माण में लगे हुए हैं। शंकर जी, गणेश जी, माता लक्ष्मी और हनुमान जी प्रतिमाओं पर काम किया जा रहा है। केवल उज्जैन स्थित कार्यशाला ही नहीं बल्कि ग्वालियर और जयपुर जैसी जगहों पर भी प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है।
सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। महाकाल महलों के लिए तैयार की जा रही है इन प्रतिमाओं का काम भी सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बारिश खत्म होने के बाद निर्माण कार्य और भी तेजी से किया जाएगा। अन्य जगह से भी कारीगर बुलाए जाएंगे ताकि काम जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।
फेज के हिसाब से बदलावा
इस बारे में उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि महाकाल लोक में 100 से ज्यादा प्रतिमाएं लगी हुई है। इन्हें फेज वाइज रिप्लेस किया जाएगा। इन्हें इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि ये स्थायी रह सकें। जो पुरानी प्रतिमाएं हटाई जाएंगी उन्हें कहां स्थापित किया जाएगा इस पर फिलहाल निर्णय नहीं दिया गया है। प्रतिमाओं के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के लिए संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने काम का निरीक्षण करने के साथ कारीगरों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दूसरी बार बदल रहा स्वरूप
बता दें कि यह दूसरी बार है जो महाकाल लोक की प्रतिमाओं का स्वरूप बदला जा रहा है। 2023 में तेज आंधी तूफान की वजह से यहां मौजूद सप्त ऋषियों की प्रतिमाएं गिर गई थी। उस समय 66 लख रुपए की लागत से बनाई गई ये प्रतिमाएं अंदर से खोखली निकली थी। इसके बाद यहां नई प्रतिमा स्थापित की गई थी। अब एक बार फिर इनका स्वरूप बदलेगा। सबसे खास बात यह है कि यह प्रतिमाएं पुराणों में वर्णित स्वरूप और साक्ष्यों के आधार पर तैयार की जा रही है। पहले स्केच तैयार कर विशेषज्ञों की समिति से उसे स्वीकृत कराया जा रहा है। उसी के आधार पर प्रतिमा को आकार दिया जा रहा है।