उज्जैन के महाकाल मंदिर में 6 साल पहले खुदाई के दौरान 1000 साल पुराना मंदिर निकला था। अब इस मंदिर के अवशेषों को जोड़कर एक बार फिर उसी शैली में इसका पुननिर्माण किया जा रहा है जिसमें यह कभी हुआ करता था। कारीगरों की पूरी टीम इस मंदिर को फिर से आकार देने में लगी हुई है।
महाकाल मंदिर परिसर में ही इस मंदिर को फिर से बनाया जा रहा है। बता दें कि यह 37 फीट ऊंचा होगा और इसका आधार तैयार कर लिया गया है। 2027 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजाना तकरीबन 28 कारीगर इस मंदिर को आकार देने के काम में लगे रहते हैं।
2020 की खुदाई में मिला था मंदिर
बता दें कि महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के पहले चरण में 2020 के दौरान जब खुदाई की जा रही थी। तब मंदिर के सामने 25 से 30 फीट नीचे खुदाई करने पर एक प्राचीन ढांचा सामने आया था। इसमें मंदिर का आधार भाग, शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और शार्दुल की मूर्तियां मिली थी। जब पुरातत्व विशेषज्ञों ने अवशेषों की जांच की तो यह सामने आया कि यह परमार कालीन मंदिर के अवशेष हैं। तभी से इसे वापस से आकार देने की कोशिश चल रही है।
37 फीट ऊंचा होगा मंदिर
बता दें कि महाकाल मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के शिखर के सामने इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। प्राचीन शैली के इस शिव मंदिर की ऊंचाई 37 फीट की होने वाली है। इसके निर्माण में 65 लाख रुपए अनुमानित खर्च किया जाने वाला है। मंदिर निर्माण का कार्य पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है।
जोड़े जा रहे पुराने अवशेष
विशेषज्ञों द्वारा खुदाई में जो स्तंभ, आमलक, कुंभ भाग और अन्य अवशेष मिले थे उनकी एक-एक का नंबरिंग की गई है। नंबरिंग के आधार पर हर एक अवशेष को उसके मूल स्थान के अनुरूप रखकर जोड़ा जा रहा है। इस तरह से प्राचीन अवशेषों को जोड़कर मंदिर को उसके मूल स्वरूप में तैयार किया जाएगा।
राजस्थान से आए कारीगर
इस प्राचीन मंदिर को फिर से आकार देने के लिए राजस्थान से विशेषज्ञ कारीगरों को बुलाया गया है। मंदिर के निर्माण में खुदाई के दौरान मिले पुराने पत्थरों का उपयोग हो रहा है। जिस हिस्से का मूल पत्थर उपलब्ध नहीं है वहां पर राजस्थान से बेसाल्ट पत्थर मंगवाकर उन्हें प्राचीन मंदिर की शैली के अनुरूप आकार देकर लगाया जा रहा है।






