सर्वपितृ अमावस्या पर उज्जैन में शिप्रा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है। आज शनिवार होने से शनिश्चरी अमावस्या का शुभ संयोग भी बन रहा है। ऐसे में इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से ही स्नान-दान और तर्पण का दौर जारी है।
त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर जहां तेल चढ़ाने के लिए भक्त लाइन में लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिद्धवट और केडी गेट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। लोग यहां सुबह 5 बजे से अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें
शनि मंदिर में लगी कतार
त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में दर्शन करने के लिए रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका था। यहां पर स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चाकचौबंद इंतजाम किए गए हैं। नदी में फव्वारे लगाए गए हैं और श्रद्धालु इन्हीं के नीचे बैठकर स्नान कर सकते हैं। किसी को भी नदी में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। भक्त शनिदेव को फूल, प्रसाद, तेल और काली उड़द अर्पित कर रहे हैं।
चप्पल जूते छोड़ने की मान्यता
शनिश्चरी अमावस्या पर त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में जो भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। वो यहां पर अपने कपड़े और चप्पल जूते छोड़कर जाते हैं। मान्यता के मुताबिक जो व्यक्ति ऐसा करता है। उसके जीवन के दुखों का अंत होता है और मन्नत भी पूरी होती है। स्नान के बाद घाटों पर बड़ी संख्या में जूते चप्पल और कपड़े इकट्ठे हो जाते हैं। भगवान को बड़ी मात्रा में तेल भी अर्पित किया जाता है। इस तेल को बाद में नीलाम किया जाता है। जिससे मिलने वाली राशि मंदिर से जुड़ी अलग-अलग चीजों में इस्तेमाल की जाती है। वहीं कपड़े और जूते चप्पल रीसाइकल किए जाते हैं।
सिद्धवट और केडी पैलेस पर भी भीड़
त्रिवेणी घाट के अलावा सिद्धवट और केडी पैलेस पर भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ पड़ रही है। केडी पैलेस स्थित शिप्रा घाट पर भूत प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलने की मान्यता के चलते कईं श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे हैं। वहीं सिद्धवट पर भी श्रद्धालु पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं। गजछाया योग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों के लिए पूजन करवा रहे हैं। भीड़ को देखते हुए मंगलनाथ से भैरवगढ़ और भैरवगढ़ से सिद्धवट जाने वाले मार्ग पर चार पहिया वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है।
