उज्जैन के रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती को लेकर शुक्रवार शाम विवाद की स्थिति बन गई। दरअसल महाकाल मंदिर समिति के बटुक आरती की तैयारी के लिए पहुंचे तो तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस ने पुरोहितों को घाट से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से शिप्रा आरती कराई।
दरअसल शुक्रवार शाम करीब 6 बजे रामघाट पर महाकाल मंदिर समिति के बटुक आरती की तैयारी के लिए पहुंचे। जैसे ही घाट पर आरती के लिए पाट बिछाया जाने लगा, पंडा समिति से जुड़े पुरोहितों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मौके पर पहले से एसडीएम एलएन गर्ग, एसडीएम पवन बारिया और महाकाल थाना पुलिस मौजूद थी। प्रशासन ने पुरोहितों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर कायम रहे। करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच विवाद चलता रहा। इसके बाद पुलिस ने पुरोहितों को घाट से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों द्वारा शिप्रा आरती कराई गई।
शिप्रा आरती विवाद में पुरोहितों का विरोध, परंपरा का दिया हवाला
दरअसल शुक्रवार को बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित रामघाट पहुंचे और उन्होंने कहा कि वे पिछले करीब 11 वर्षों से नियमित रूप से शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं। पुरोहितों का कहना है कि महाकाल मंदिर समिति को आरती की जिम्मेदारी सौंपने से वर्षों से चली आ रही व्यवस्था प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि उन्हें परंपरा से अलग करने की कोशिश की जा रही है। विवाद के दौरान पुरोहितों ने आरती नहीं होने देने की बात कही, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें घाट से हटाया। इससे पहले गुरुवार को भी इसी मुद्दे पर विवाद हुआ था। उस दिन महाकाल मंदिर समिति के बटुक और पंडा समिति के पुरोहित दोनों रामघाट पहुंचे थे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से मिलकर आरती करने का सुझाव दिया था, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद दोनों पक्षों ने अलग-अलग स्थानों पर आरती की थी।
महाकाल मंदिर समिति की नई व्यवस्था पर प्रशासन का पक्ष
वहीं प्रशासन का कहना है कि महाकाल मंदिर समिति की ओर से शिप्रा आरती के स्वरूप में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। एसडीएम पवन बारिया ने बताया कि उज्जैन में हरिद्वार की तर्ज पर शिप्रा नदी के किनारे भव्य आरती शुरू करने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि किसी पुरोहित को हटाने का उद्देश्य नहीं है, बल्कि आरती को नए स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। वहीं एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने पंडा समिति के पुरोहितों को महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ मिलकर आरती करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। प्रशासन के अनुसार अब रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से कराई जाएगी। दूसरी ओर पंडा समिति के प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे अपनी परंपरा के अनुसार शिप्रा आरती कराते रहेंगे और इस व्यवस्था का विरोध जारी रखेंगे।






