धर्मनगरी उज्जैन से देश की आजादी का एक खास नाता जुड़ा है, जो हर साल तारीख के बजाय तिथि के जरिए जीवंत होता है। इसी अनूठी परंपरा के तहत विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन के 119 साल पुराने बड़े गणेश मंदिर में इस बार स्वतंत्रता दिवस तय तारीख से चार दिन पहले मनाया गया। देशभर में जहां 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, वहीं इस मंदिर में अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार आजादी का पर्व मनाने की परंपरा है। इस वर्ष श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को होने के कारण मंदिर में विधि-विधान से ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
दरअसल इस परंपरा के पीछे की कहानी देश की आजादी के समय से जुड़ी है। पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, वर्ष 1947 में जिस दिन भारत आजाद हुआ, यानी 15 अगस्त को, हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि थी। इसी तिथि को आधार बनाकर बड़े गणेश मंदिर में हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है पहले स्वतंत्रता दिवस?
व्यास परिवार से जुड़े पंडित अक्षत व्यास के अनुसार, आजादी से पहले स्वतंत्रता प्राप्ति के शुभ समय को लेकर मंथन चल रहा था। इसी दौरान तत्कालीन राष्ट्रीय नेतृत्व ने उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास से संपर्क किया था। बताया जाता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पत्र लिखकर पंडित व्यास से पूछा था कि देश को किस शुभ मुहूर्त में स्वतंत्रता प्राप्त करनी चाहिए। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना और पंचांग के आधार पर श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को शुभ बताया था।
आधी रात आजादी का समय तय करने की कहानी
वहीं पंडित सूर्य नारायण व्यास की सलाह के बाद 14 और 15 अगस्त की दरमियानी रात 12 बजे का समय आजादी के लिए तय किया गया। इसके पीछे मुख्य तर्क यह था कि उस समय भारत की कुंडली में स्थिर वृषभ लग्न बन रहा था। पंडित व्यास का मानना था कि स्थिर लग्न में देश के आजाद होने से लोकतंत्र और स्वतंत्रता लंबे समय तक स्थिर और मजबूत रहेंगे। उन्होंने आधी रात को ध्वजारोहण करने का सुझाव भी दिया था।
बताया जाता है कि पंडित व्यास ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा था कि यदि आजादी का समय आधी रात तय किया जा रहा है, तो पहला ध्वजारोहण भी उसी समय होना चाहिए। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस सुझाव को स्वीकार किया और आधी रात को लाल किले पर तिरंगा फहराया गया। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित सूर्य नारायण व्यास को आभार पत्र भी भेजा था।
तिरंगे के रंगों से सजा मंदिर
वहीं इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस की तिथि पर बड़े गणेश मंदिर को तिरंगे के रंगों से सजाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल रहा। व्यास परिवार के पुश्तैनी आवास से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जो देशभक्ति के गीतों और नारों के बीच बड़े गणेश मंदिर पहुंची। यहां विधि-विधान से ध्वज पूजन और गणेश पूजन किया गया। इसके बाद भगवान गणेश की महाआरती हुई।
देशभक्ति के नारों के बीच मंदिर के ऊंचे शिखर पर तिरंगा फहराया गया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पिछले 79 वर्षों से चली आ रही इस पारिवारिक और धार्मिक परंपरा में किसी तरह का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता है। आयोजन व्यास परिवार और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है।
1907 से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
दरअसल बड़े गणेश मंदिर का इतिहास भी काफी खास है। वर्ष 1907 में पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा आयोजित ज्योतिष महाधिवेशन में उज्जैन के पंडित नारायण जी व्यास शामिल हुए थे। बताया जाता है कि इसी दौरान उन्होंने भारत के महान गणतंत्र बनने की भविष्यवाणी की थी। उज्जैन लौटने के बाद उन्होंने ही यहां विशाल गणेश प्रतिमा की स्थापना की। इस तरह बड़ा गणेश मंदिर आज भी धर्म, ज्योतिष और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।






