उज्जैन की सड़कों पर आज सिर्फ ट्रैक्टरों की आवाज नहीं है, बल्कि नाराजगी, चिंता और अपने हक की लड़ाई की गूंज भी है। बुधवार, 25 फरवरी 2026 को उज्जैन में किसानों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। 90 गांवों से सैकड़ों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन और बिस्तर लेकर कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़े हैं। उनका साफ कहना है, जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक घर वापसी नहीं होगी।
यह विरोध सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि भविष्य का सवाल बन चुका है। उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड रोड प्रोजेक्ट के तहत जिन खेतों का अधिग्रहण होना है, वे कई परिवारों की पीढ़ियों की कमाई हैं। किसानों का आरोप है कि एक्सिस कंट्रोल प्लान के कारण वे खुद अपनी ही जमीन से बनने वाली सड़क पर वाहन नहीं चला सकेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है, जब फायदा नहीं, तो जमीन क्यों दें?
क्या है पूरा मामला?
उज्जैन में किसानों का बड़ा प्रदर्शन दरअसल ग्रीन फील्ड रोड प्रोजेक्ट के खिलाफ है। यह परियोजना सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सरकार की योजना के अनुसार करीब 7 हजार करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा के बीच नई सड़कें बनाई जानी हैं।
इन सड़कों को “ग्रीन फील्ड” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह बिल्कुल नई जमीन पर बनाई जाएंगी, न कि किसी पुरानी सड़क के चौड़ीकरण से। लेकिन समस्या यहीं से शुरू होती है। सड़क के दोनों ओर एक्सिस कंट्रोल प्लान लागू होगा, यानी सीधे-सीधे सड़क पर चढ़ने की अनुमति नहीं होगी। किसानों का कहना है कि अगर वे अपने खेत से ट्रैक्टर या वाहन सड़क पर नहीं ला पाएंगे, तो यह उनके लिए बेकार है।
90 गांवों से जुटे सैकड़ों किसान, 180 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
आज के उज्जैन में किसानों का बड़ा प्रदर्शन की खास बात यह है कि यह सिर्फ एक-दो गांव का विरोध नहीं है। उज्जैन, इंदौर और रतलाम जिले के लगभग 90 गांवों से किसान एकजुट होकर आए हैं। करीब 180 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन, बिस्तर और जरूरी सामान लाया गया है।
इससे साफ है कि यह प्रदर्शन एक दिन का नहीं होगा। किसानों ने पहले ही अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक अधिग्रहण की शर्तें नहीं बदली जाएंगी और एक्सिस कंट्रोल प्लान में सुधार नहीं होगा, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। कलेक्टर कार्यालय के बाहर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन बातचीत की तैयारी में है, लेकिन किसान नेतृत्व का रुख सख्त बताया जा रहा है।
“सड़क पर वाहन नहीं चढ़ेंगे, तो जमीन क्यों दें?”
किसान नेता राजेश सोलंकी ने साफ शब्दों में कहा कि जिस सड़क पर ग्रामीण अपने वाहन ही नहीं चढ़ा सकेंगे, उस सड़क के लिए उपजाऊ जमीन देना समझदारी नहीं है। उनका कहना है कि यह जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी है।
किसानों का तर्क है कि अगर एक्सिस कंट्रोल रहेगा, तो खेत से सीधे सड़क पर जाना संभव नहीं होगा। इसके लिए अलग से सर्विस रोड या अंडरपास की जरूरत पड़ेगी, जो हर जगह संभव नहीं है। ऐसे में किसान खुद को नुकसान में देख रहे हैं। उज्जैन में किसानों का बड़ा प्रदर्शन इसी सवाल पर केंद्रित है विकास चाहिए, लेकिन बिना नुकसान के।
सिंहस्थ 2028 और 7 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट
सरकार की ओर से यह परियोजना सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए नई सड़कें जरूरी बताई जा रही हैं।
करीब 7 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इन ग्रीन फील्ड सड़कों से उज्जैन, इंदौर और रतलाम के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद है। उद्योग, व्यापार और पर्यटन को भी इससे फायदा होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास और किसान हित साथ-साथ चल सकते हैं? यही मुद्दा उज्जैन में किसानों का बड़ा प्रदर्शन को बड़ा बना रहा है।






