उज्जैन नगर निगम के विशेष सम्मेलन में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रही मंछामन मल्टी का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। दरअसल अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए निगम ने 15 करोड़ रुपए का लोन लेने का प्रस्ताव रखा लेकिन पार्षदों और सभापति ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अक्टूबर 2024 में इसी काम के लिए 30 करोड़ रुपए का लोन पहले ही मंजूर किया जा चुका था। करीब दो साल बाद भी निर्माण आगे नहीं बढ़ने से अब पुराने प्रस्ताव और नई मंजूरी को लेकर सदन में बहस हुई।
दरअसल उज्जैन में मंछामन मल्टी उन गरीब परिवारों के लिए बनाई जा रही है जिनके पास अपना मकान या जमीन नहीं है। महापौर मुकेश टटवाल का कहना है कि निर्माण पूरा करने के लिए 15 करोड़ रुपए का लोन जरूरी है ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे हितग्राहियों को घर मिल सके। वहीं नेता प्रतिपक्ष रवि राय और सभापति कलावती यादव ने सवाल उठाया कि जब 30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव पहले ही पास हो चुका है तो पुराने फैसले में बदलाव किए बिना नया प्रस्ताव कैसे लाया जा सकता है।
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जानिए मंछामन मल्टी के लिए 15 करोड़ के लोन पर क्यों उठे सवाल?
दरअसल, 25 अक्टूबर 2024 को महापौर-इन-काउंसिल और नगर निगम परिषद इसी मल्टी के लिए 30 करोड़ रुपए का लोन लेने की मंजूरी दे चुके थे। इसके बावजूद करीब दो साल में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। अब निगम पुराने प्रस्ताव में बदलाव कर 15 करोड़ रुपए का लोन लेने की बात कर रहा है। इसी पर सभापति कलावती यादव ने प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पहले से मंजूर 30 करोड़ रुपए के प्रस्ताव में जरूरी संशोधन किए बिना 15 करोड़ रुपए का नया प्रस्ताव पारित करना सही नहीं होगा। सदन में इस बात को लेकर कुछ देर तक असमंजस बना रहा। सभापति ने साफ किया कि उन्हें लोन लेने पर आपत्ति नहीं है लेकिन नगर निगम के पुराने फैसले और नए प्रस्ताव के बीच की गड़बड़ी दूर होनी चाहिए। उनका कहना था कि सदन से पास होने वाला ठहराव नियमों के मुताबिक होना चाहिए ताकि भविष्य में उसे कोर्ट में चुनौती मिलने पर परेशानी न हो। यानी सवाल सिर्फ लोन की रकम का नहीं, बल्कि उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया का भी है।
महापौर मुकेश टटवाल बोले – ‘लोन लेकर गरीबों के मकान पूरे कराएं’
वहीं महापौर मुकेश टटवाल ने सदन में कहा कि मंछामन मल्टी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन लोगों के लिए बनाई जा रही है जिनके पास खुद का मकान या जमीन नहीं है। सर्वे के बाद करीब आठ साल पहले ही हितग्राहियों को आवास आवंटित कर दिए गए थे लेकिन निर्माण पूरा नहीं होने से उन्हें अब तक घर नहीं मिल पाए हैं। महापौर के मुताबिक, वे पद संभालने के बाद से इस काम को पूरा कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 15 करोड़ रुपए का लोन लेने का मकसद निर्माण को पूरा करना और गरीब परिवारों को जल्द मकान देना है। उन्होंने पार्षदों से प्रस्ताव पर सहमति देने की अपील भी की। उनका कहना था कि अगर अब भी लोन लेने का फैसला नहीं हुआ तो निर्माण दो से चार साल और अटक सकता है।
महापौर ने बताया कि योजना के तहत 192 हितग्राहियों से 2 लाख रुपए और 96 हितग्राहियों से 5 लाख रुपए लिए जाने हैं। इससे निगम को करीब 9 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा अलखधाम में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और कनीपुरा व मंछामन की दुकानों की बिक्री से भी पैसा मिलने की बात कही गई। निगम की योजना इन अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली राशि के जरिए निर्माण कार्य पूरा कराने की है।
रवि राय ने पुराने प्रस्ताव पर उठाए सवाल
दरअसल नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने कहा कि 2024 में परिषद मंछामन मल्टी के लिए 30 करोड़ रुपए का लोन मंजूर कर चुकी थी। उस समय अधिकारियों को लोन की प्रक्रिया पूरी कर निर्माण जल्द पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद अब दोबारा लोन का प्रस्ताव लाया गया है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि एक ही काम के लिए पहले 30 करोड़ और अब 15 करोड़ रुपए का प्रस्ताव क्यों रखा जा रहा है।
