महाष्टमी पर उज्जैन में होगी नगर पूजा, देवी और भैरव मंदिरों में चढ़ाई जाएगी मदिरा की धार

उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बार फिर सोमवार को महाष्टमी के दिन ये परंपरा निभाई जाएगी। शहर के देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा की धार अर्पित की जाएगी।
Ujjain

उज्जैन में नवरात्रि का रंग काफी खास होता है। यहां केवल घरों और पंडालों में माता की स्थापना कर उन्हें विराजित ही नहीं किया जाता बल्कि बहुत ही खास नगर पूजा भी की जाती है। लोग जहां अपने अपने घरों में और पंडाल में बैठाई गई माता की पूजा करते हैं। उस बीच उज्जैन के देवी और भैरव मंदिरों में नगर पूजा की जाती है।

हर साल महाष्टमी पर आयोजित होने वाली यह पूजा नगर की सुख समृद्धि के लिए की जाती है। इस दौरान मदिरा की धार से पूरे शहर में पूजा होती है। इसकी शुरुआत कलेक्टर द्वारा 24 खंबा मंदिर स्थित माता महामाया और महालाया को मदिरा की धार चढ़ाकर होती है। इस बार सोमवार को ये पूजा की जाएगी।

कैसे होती है नगर पूजा

उज्जैन में नगर पूजा की ये परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। ये पूजा नगर के राजा यानी जो कलेक्टर होता है के द्वारा की जाती है। दोनों माता को मदिरा की धार चढ़ाने के बाद शासकीय अधिकारी और कोटवारों का दल नगर के अलग-अलग स्थान पर विराजित 40 से ज्यादा देवी और भैरव मंदिरों में ये धार चढ़ाते हैं। गढ़कालिका के आगे हांडी फोड़ भैरव पर ये पूजा समाप्त होती है। 27 किलोमीटर लंबे पूजा मार्ग पर 25 लीटर से ज्यादा मदिरा का उपयोग होता है।

दो तरह की पूजा

इस नगर पूजा के दौरान तामसिक और सात्विक दोनों ही तरह की परंपराओं का ध्यान रखा जाता है। कुछ देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा अर्पित की जाती है। वहीं हनुमान मंदिर में नारियल, तेल सिंदूर और ध्वज अर्पित करने की परंपरा है। इस दौरान मंदिरों में भोग भी अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के मुताबिक नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति प्रदान करने के लिए ऐसा किया जाता है।

2100 साल से चल रही परंपरा

नगर पूजा की ये परंपरा लगभग 2100 साल पुरानी बताई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सम्राट विक्रमादित्य ने इसकी शुरुआत की थी। सिंधिया स्टेट के समय भी इसे निभाया गया और अब लगातार इसका निर्वहन किया जा रहा है। इस बार 19 अक्टूबर को यह पूजा की जाने वाली है।

Diksha Bhanupriy
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