उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की बीकॉम और बीसीए तृतीय वर्ष की परीक्षा के दौरान सोमवार को यह विवाद सामने आया। दरअसल फाउंडेशन पेपर में छात्रों से ‘अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है’ से जुड़ा सवाल पूछा गया। वहीं यह प्रश्न सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
दरअसल यह सवाल बीकॉम और बीसीए के फाउंडेशन कोर्स के पेपर में शामिल था। प्रश्न के साथ चार विकल्प दिए गए थे— सोमेश्वर, खुदा, शक्तिवान और दंड देने वाला। विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षा में इस तरह का धार्मिक संदर्भ वाला प्रश्न आने से छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे अकादमिक दायरे से बाहर बताया है।
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हिंदू संगठनों ने विरोध जताया
वहीं प्रश्न पत्र की जानकारी सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आने के बाद उज्जैन और रतलाम में कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध जताया। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक रितेश माहेश्वरी ने कहा कि जिस व्यक्ति या प्रोफेसर ने यह प्रश्न पत्र तैयार किया है, उसके खिलाफ विश्वविद्यालय को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन आंदोलन कर सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल शर्मा ने मामले की जांच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि यह पूरा प्रकरण परीक्षा समिति को भेज दिया गया है और समिति से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कुलसचिव ने कहा कि फाउंडेशन कोर्स में विभिन्न धर्मों से जुड़े प्रश्न हो सकते हैं, लेकिन इस तरह का सीधा धार्मिक कथन प्रश्न के रूप में पूछा जाना उचित नहीं माना जाता।
परीक्षा विभाग की एक बैठक भी बुलाई गई
विश्वविद्यालय के कुलपति अर्पण भारद्वाज ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक से इस संबंध में जवाब मांगा है कि यह प्रश्न प्रश्न पत्र में कैसे शामिल हुआ। साथ ही परीक्षा विभाग की एक बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें इस मामले पर चर्चा की जाएगी। यदि जांच के बाद इस प्रश्न को प्रश्न पत्र से हटाने का फैसला किया जाता है, तो छात्रों को उस प्रश्न के अंक किस प्रकार दिए जाएंगे, इस पर भी विचार किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित और परीक्षा की निष्पक्षता दोनों का ध्यान रखा जाएगा।
फाउंडेशन कोर्स का उद्देश्य छात्रों को समाज, संस्कृति और विभिन्न विषयों की समझ देना होता है। हालांकि ऐसे विषयों में प्रश्न पूछते समय तटस्थता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसलिए अब विश्वविद्यालय यह जांच कर रहा है कि प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कहां गलती हुई।