समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का सनसनीखेज आरोप लगाया। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा कि यह प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की जा रही है ताकि भाजपा को चुनावी लाभ मिल सके।

अखिलेश ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने उन निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की है जहां सपा कम अंतर से हारी और जहां मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि पिछड़ी जातियों के वोटों को जानबूझकर हटाया जा रहा है। हमने पहले भी इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह सब भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।” सपा नेता ने मांग की कि मतदाता सूची को उनके इच्छित प्रारूप में उपलब्ध कराया जाए ताकि वे और मामले सामने ला सकें।

दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, “हमारी मांग है कि उन जिला अधिकारियों को निलंबित किया जाए जो इस गलत प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार हैं। यदि ऐसा होता है, तो देश में कहीं भी एक भी वोट नहीं कटेगा।” उन्होंने चुनावों के दौरान अधिकारियों की नियुक्ति के तरीके पर भी सवाल उठाए और जाति आधारित चयन का विरोध किया।

राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज

अखिलेश के इन आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके बयान से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सपा की ओर से इस मुद्दे पर और सबूत पेश करने की बात कही गई है, जिसके बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।