इस सप्ताह कानपुर और आसपास के लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर फैसला हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा नदी पर ट्रांसगंगा सिटी को सीधे शहर से जोड़ने वाली सेतु परियोजना को मंजूरी दी है, जिसकी कुल स्वीकृत लागत 75313.24 लाख रुपये, यानी करीब 753.13 करोड़ रुपये तय की गई है।
मामला सिर्फ एक पुल का नहीं है। ट्रांसगंगा सिटी के पूरी तरह विकसित होने के बाद भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही तेजी से बढ़ने का अनुमान है, और मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर ट्रैफिक दबाव इतना बढ़ सकता है कि रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित हो। इसी दबाव को पहले से संभालने के लिए नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।
एक चार लेन पुल से बात नहीं बनी, डिजाइन बदला गया
शुरुआती योजना में चार लेन का एक सेतु प्रस्तावित था। लेकिन तकनीकी और यातायात आकलन में यह आशंका सामने आई कि एक ही स्थान पर मर्जिंग प्वाइंट बनने से ट्रैफिक घनत्व बढ़ेगा और जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके बाद परियोजना को संशोधित किया गया और अब मॉडल यह है कि दो-दो लेन के दो अलग सेतु बनाए जाएं, ताकि वाहनों का दबाव अलग-अलग कॉरिडोर में बंट सके।
यही बदलाव इस परियोजना की असली दिशा तय करता है। बाद में सुधार करने से बेहतर है, शुरुआत में ही ट्रैफिक पैटर्न के हिसाब से संरचना बनाई जाए।
460 करोड़ सरकार देगी, बाकी रकम प्राधिकरण उठाएगा
परियोजना को व्यय वित्त समिति से मंजूरी मिल चुकी है। अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने 46000 लाख रुपये, यानी 460 करोड़ रुपये की मांग की थी। राज्य मंत्रिपरिषद ने इस राशि को मिशन के तहत उपलब्ध कराने की स्वीकृति दे दी है।
कुल लागत 753.13 करोड़ रुपये होने के कारण शेष राशि UPSIDA को अपने संसाधनों से वहन करनी होगी। इसका मतलब यह है कि फंडिंग मॉडल दो हिस्सों में चलेगा, एक हिस्सा राज्य सहायता से और दूसरा संस्थागत संसाधनों से, ताकि निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 की योजना के भीतर आगे बढ़ सके।
कानपुर-उन्नाव औद्योगिक बेल्ट पर सीधा असर
ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर की औद्योगिक जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है, जहां शहर और आसपास की इकाइयों को सुव्यवस्थित तरीके से शिफ्ट करने का लक्ष्य है। गंगा पार कनेक्टिविटी मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत, ट्रांसपोर्ट समय और माल ढुलाई के रूट पर सीधा असर पड़ेगा। कानपुर शहर, ट्रांसगंगा क्षेत्र और उन्नाव की तरफ आवाजाही करने वाले छोटे कारोबारी, फैक्ट्री वाहन और दैनिक यात्री इस फैसले के सबसे बड़े लाभार्थी माने जा रहे हैं।
अब अगला चरण परियोजना के क्रियान्वयन का है, जिसमें विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया, निविदा और निर्माण टाइमलाइन तय की जाएगी। वित्तीय मंजूरी के बाद प्रशासनिक और इंजीनियरिंग स्तर की फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी, क्योंकि परियोजना को 2025-26 के ढांचे में रखा गया है।






