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पंचायत चुनाव से पहले यूपी भाजपा में जातीय समीकरण को लेकर हलचल, नेताओं में सियासी गोलबंदी तेज

Written by:Deepak Kumar
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पंचायत चुनाव से पहले यूपी भाजपा में जातीय समीकरण को लेकर हलचल, नेताओं में सियासी गोलबंदी तेज

पंचायत चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी में जातीय गोलबंदी का दौर तेज हो गया है। पार्टी के भीतर विभिन्न जातियां अपनी ताकत दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। पहले राजधानी के एक होटल में करीब 40 क्षत्रिय विधायक एकत्रित हुए और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। इसके बाद दूसरी बैठक में भी क्षेत्रीय समुदाय से जुड़े कई विधायक मौजूद रहे। इसी क्रम में सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच के बैनर तले कुर्मी समाज की सभा हुई, जिसमें बड़ी संख्या में मंत्री और विधायक शामिल हुए।

लोधी समाज का शक्ति प्रदर्शन

आज लोधी समाज अवंतीबाई के नाम पर आंवला (रुहेलखंड) में एकत्रित हुआ और अपनी ताकत दिखा रहा है। इस कार्यक्रम में समाज से जुड़े तमाम मंत्री और विधायक मंच साझा कर रहे हैं। वीरांगना रानी अवंतीबाई बाई लोधी की जयंती पर उनके प्रतिमा का अनावरण मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंत्री धर्मपाल सिंह ने की। इस सभा में केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, प्रदेश मंत्री संदीप सिंह, राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, सांसद साक्षी महाराज समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया और विपक्ष की आलोचना

भाजपा के एमएलसी अवनीश पटेल का कहना है कि यह बैठक नियमित रूप से आयोजित होने वाली बैठक थी, जिसमें सामाजिक उत्थान और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होती है। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने क्षत्रिय समुदाय की बैठक को लेकर निशाना साधा और कहा कि भाजपा के भीतर पीडीए समुदाय से जुड़े नेता घुटन महसूस कर रहे हैं और उन्हें पार्टी में स्पष्ट राजनीतिक भविष्य नहीं दिख रहा। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने भी भाजपा पर आरोप लगाया कि अब पार्टी जातीय आधार पर बंट चुकी है और सरकार में सिर्फ एक वर्ग का बोलबाला है। सपा प्रवक्ता अशोक यादव ने कहा कि जातिवार बैठकों से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा के विधायक उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

संगठन और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि भाजपा के भीतर यह जातीय गोलबंदी संगठन और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भाजपा में जातीय प्रतिनिधित्व संतुलित दिखता है, लेकिन अगर पार्टी की छवि ‘अपरकास्ट पार्टी’ के रूप में बनती है तो पंचायत से लेकर विधानसभा तक नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि पीडीए के एजेंडे को काटने और सभी समुदायों को संतुष्ट रखने के लिए भाजपा को ठोस रणनीति अपनानी होगी, वरना इन बैठकों के नकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में सामने आ सकते हैं।

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Deepak Kumar
लेखक के बारे में
तेज ब्रेकिंग के साथ सटीक विश्लेषण और असरदार लेखन में माहिर हैं। देश-दुनिया की हलचल पर नजर रखते हैं और उसे सरल व असरदार तरीके से लिखना पसंद करते हैं। तीन सालों से खबरों की दुनिया से जुड़े हैं। View all posts by Deepak Kumar
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