2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल मानकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने ‘पूर्व तैयारी-पूर्ण तैयारी’ का मंत्र अपनाते हुए गांव-गांव में अपने संगठन को सक्रिय करने की रणनीति बनाई है। महामंत्री (संगठन) धर्मल सिंह स्वयं तैयारियों पर नजर रख रहे हैं और क्षेत्रवार समीक्षा कर रहे हैं। बूथ समिति, मंडल इकाई और शक्ति केंद्रों को सक्रिय कर ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव के महत्व को समझाया जाएगा।
भाजपा का मुख्य लक्ष्य त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अधिक से अधिक जिला पंचायत अध्यक्षों को जिताना है। चूंकि पंचायत चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते, इसलिए पार्टी केवल जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव पर ध्यान देगी। ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के पदों पर पार्टी कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इन पदों पर होने वाले विवादों से बचने के लिए पार्टी ने निर्णय लिया है कि वह न तो किसी को इन पदों के लिए प्रोत्साहित करेगी और न ही किसी को रोकेगी, जैसा कि पहले की परंपरा रही है।
लाभार्थियों को मतदाता बनाने की रणनीति
हाल ही में पुनर्गठित बूथ समिति, मंडल इकाई और शक्ति केंद्रों के लिए पंचायत चुनाव पहली बड़ी चुनौती होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट किया जाएगा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं का पार्टी में सम्मान बढ़ेगा। साथ ही, केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को मतदाता के रूप में जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर लाभार्थियों को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
घर-घर संपर्क और मतदाता सूची की सफाई
मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत भाजपा की बूथ कमेटी और बूथ लेवल एजेंट घर-घर जाकर नए मतदाताओं को जोड़ने का काम करेंगे। उनके पास बूथ-स्तर पर मतदाता सूची की पूरी जानकारी होगी, जिसके आधार पर वे उन मतदाताओं के नाम हटवाएंगे जो अब जीवित नहीं हैं या गांव छोड़कर चले गए हैं। इस अभियान के जरिए पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।
पंचायत चुनाव एक नजर
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कुल ग्राम पंचायत: 57,694
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क्षेत्र पंचायत: 826
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जिला पंचायत: 75





