हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर विवाद देखने को मिल रहा है। दरअसल बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर अपने नेताओं को फायदा पहुंचाने में लगी हुई है। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।
दरअसल बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा है कि एक तरफ आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है तो वहीं दूसरी ओर सरकार बोर्ड, कॉरपोरेशन और आयोगों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां कर रही है।
नियुक्तियों पर क्यों उठ रहे सवाल?
वहीं संदीपनी भारद्वाज ने दावा किया है कि इन पदों पर मानदेय को 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसके साथ ही अन्य भत्तों को जोड़कर यह राशि 1 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच रही है। उनके मुताबिक, मार्च 2026 तक करीब 40 चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन नियुक्त किए जा चुके हैं। दरअसल हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां हमेशा से चर्चा का विषय रही हैं लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा गरमाया हुआ है क्योंकि राज्य पहले से ही आर्थिक दबाव में है।
कई पदों को कैबिनेट रैंक तक देने का दावा
दरअसल बीजेपी का कहना है कि सरकार ने सत्ता में आते ही अपने समर्थकों को विभिन्न पदों पर नियुक्त करना शुरू कर दिया। इनमें सलाहकार, ओएसडी, मीडिया और आईटी सलाहकार जैसे कई पद शामिल हैं। इसके आलावा यह भी आरोप लगाया है कि इनमें से कई पदों को कैबिनेट रैंक तक दिया गया है, जिससे सरकारी खर्च और बढ़ गया। इसके अलावा सहकारी बैंक, पर्यटन बोर्ड, उद्योग विकास निगम और विभिन्न आयोगों में भी नियुक्तियां की गई हैं। बीजेपी का दावा है कि यह कदम राजनीतिक संतुलन बनाने के बजाय पार्टी के लोगों को खुश करने के लिए उठाए गए हैं।






