वाराणसी में योगी आदित्यनाथ ने फिल्म निर्माताओं से अपील करते हुए कहा है कि फिल्मों में सकारात्मक और आदर्श चरित्रों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और खलनायकों का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। दरअसल उनका कहना था कि ऐसी फिल्में समाज और आने वाली पीढ़ियों पर नकारात्मक असर डालती हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री ने यह बात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान कही।

दरअसल वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों से खुलकर संवाद करते हुए कहा कि फिल्मों में सकारात्मक और प्रेरणादायक चरित्रों को प्रमुखता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खलनायकों को नायक के रूप में प्रस्तुत करना समाज और नई पीढ़ी के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इसका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को बीएलडब्ल्यू ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे।

जानिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?

सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस भव्य नाट्य प्रस्तुति के उद्घाटन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि एक समय फिल्मों में अच्छे पात्रों को खलनायक और खलनायकों को नायक के रूप में दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ गई थी, जिसके कारण समाज में आदर्शों की कमी दिखाई देने लगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज के सामने सही आदर्श प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज कमजोर पड़ जाती है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में बननी चाहिए जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें। उन्होंने कहा कि यदि किसी डकैत को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा तो युवा पीढ़ी उसे ही अपना आदर्श मानने लगेगी, इसलिए कभी भी डकैतों का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए।

भारतीय सिनेमा ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: योगी आदित्यनाथ

दरअसल योगी आदित्यनाथ ने भारतीय सिनेमा के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा ने हमेशा देश के मूल्यों और आदर्शों को प्रतिबिंबित करते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक एकता लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर आधारित यह महानाट्य कार्यक्रम काशी की पावन धरा को उज्जैन से सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हुए ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान को आगे बढ़ा रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, जैसे योग और आयुर्वेद, को वैश्विक स्तर पर मिल रही मान्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत आज पूरी दुनिया में सम्मान प्राप्त कर रही है।

मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगभग दो हजार वर्ष पहले वर्तमान अयोध्या की खोज महाराज विक्रमादित्य ने ही की थी और भगवान श्रीराम के मंदिर का पुनर्निर्माण भी उन्होंने ही करवाया था। उन्होंने बताया कि महाराज विक्रमादित्य नीति, शास्त्र और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं और उज्जैन की वेधशालाएं इसका सटीक उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया

योगी आदित्यनाथ ने भारतीय कालगणना के महत्व को बताते हुए कहा कि भारतीय कालगणना विक्रम संवत के आधार पर आगे बढ़ती है। उन्होंने कहा कि काशी पंचांग की धरती है और कालगणना की धरती उज्जैन है। इन दोनों का समन्वय भारतीय कालगणना को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का जीवन दान, वीरता, साहस, परिश्रम और सुशासन का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नाट्य प्रस्तुति ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करेगी और नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही

मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि दोनों राज्य पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को भारत की कालगणना पर आधारित 700 किलोग्राम की ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ भेंट की। यह भव्य वैदिक घड़ी अब काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित की जाएगी, जो दोनों राज्यों के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनेगी।