उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निषाद पार्टी के कार्यालय के बाहर लगे एक होर्डिंग ने सियासी हलचल मचा दी है। होर्डिंग पर लिखा स्लोगन, “निषाद की ताकत को मत आजमाओ, भरोसे को यूं मत गवाओ,” बीजेपी के साथ गठबंधन में तनाव की अटकलों को हवा दे रहा है। निषाद पार्टी के नेता बिजेंद्र त्रिपाठी द्वारा लगाए गए इस होर्डिंग के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी अपनी सहयोगी बीजेपी से अलग होने की तैयारी में है।
हाल ही में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस मुलाकात से पहले संजय निषाद ने गठबंधन पर तीखा बयान देते हुए बीजेपी को चुनौती दी थी कि अगर वह सहयोगी दलों को कमजोर मानती है, तो गठबंधन तोड़ दे। उनकी इस टिप्पणी के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने फोन पर बात कर मतभेद सुलझाने का आश्वासन दिया था। इस पृष्ठभूमि में होर्डिंग का लगना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
ये भी पढ़ें
बीजेपी को निषाद समुदाय की ताकत का अहसास
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निषाद पार्टी का यह कदम बीजेपी को निषाद समुदाय की ताकत का अहसास दिलाने की कोशिश है। निषाद पार्टी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी द्वारा ओबीसी समुदायों, खासकर निषाद, राजभर, पटेल और जाट नेताओं के बीच नया नेतृत्व तैयार करने की कोशिश से सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ रहा है। जय प्रकाश निषाद और साध्वी निरंजन ज्योति जैसे बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों ने भी निषाद पार्टी की चिंताओं को बढ़ाया है।
होर्डिंग उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस
होर्डिंग विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। निषाद पार्टी का यह कदम गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। संजय निषाद की हालिया सक्रियता और बीजेपी के साथ उनकी तल्ख बयानबाजी से यह संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन की गतिशीलता में बदलाव आ सकता है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।