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गाजियाबाद के हरीश राणा को 13 साल बाद इच्छा मृत्यु की इजाजत, आंखें नम कर रहा विदाई का ये VIDEO

Written by:Rishabh Namdev
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे, को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया से पहले का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला उन्हें सबसे माफी मांगने और सबको माफ करने के लिए कह रही है।
गाजियाबाद के हरीश राणा को 13 साल बाद इच्छा मृत्यु की इजाजत, आंखें नम कर रहा विदाई का ये VIDEO

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 13 साल से एक बिस्तर पर ‘जिंदा लाश’ की तरह जीवन बिता रहे हरीश राणा को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिल गई है। इस फैसले के बाद, हरीश के जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोगों का दिल दहल गया है।

वायरल वीडियो में एक महिला हरीश के सिर पर हाथ फेरते हुए बेहद भावुक होकर कह रही है कि वह सभी को माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाएं। इस दौरान हरीश कुछ प्रतिक्रिया देने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी है कि जुबान हिलने के बावजूद कोई आवाज नहीं निकल पाती। यह मार्मिक दृश्य सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को रुला चुका है।

13 साल पहले एक हादसे ने छीनी जिंदगी

हरीश राणा कभी एक होनहार इंजीनियरिंग के छात्र थे, लेकिन करीब 13 साल पहले एक भयानक हादसे ने उनकी दुनिया हमेशा के लिए बदल दी। इस हादसे के बाद वह स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (Permanent Vegetative State) में चले गए। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर तो जीवित रहता है, लेकिन मस्तिष्क लगभग निष्क्रिय हो जाता है। हरीश न तो बोल सकते थे, न चल सकते थे और न ही अपने आसपास की दुनिया को महसूस कर सकते थे।

पिछले 13 साल, यानी 4588 दिन, उनका परिवार इसी दर्द और उम्मीद के बीच जीता रहा। हरीश का जीवन पूरी तरह से मेडिकल सपोर्ट और ट्यूब के सहारे चल रहा था। उनके पिता ने कहा कि बेटे के जीवन रक्षक उपकरण हटाने का फैसला लेना उनके लिए सबसे मुश्किल क्षणों में से एक है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रिया के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी। अदालत ने अपने फैसले में कई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट्स और परिवार की सहमति को आधार बनाया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हरीश को दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाए, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी देखभाल करेगी।

“हमने 4588 दिन इस दर्द के साथ बिताए हैं, लेकिन अपने बेटे के जीवन रक्षक उपकरण हटाने का फैसला लेना उससे भी ज्यादा मुश्किल है।” — हरीश के पिता

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पोषण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पीईजी ट्यूब (PEG Tube) भी मेडिकल ट्रीटमेंट की श्रेणी में आती है और इसे हटाना पैसिव यूथेनेशिया का ही हिस्सा माना जाएगा। डॉक्टरों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद अब धीरे-धीरे और मानवीय तरीके से हरीश के जीवन रक्षक उपकरण हटाए जाएंगे ताकि उनकी गरिमा बनी रहे।

वीडियो देख सोशल मीडिया पर छलका दर्द

हरीश के अंतिम पलों से पहले का यह वीडियो @Mamtasulaniya नाम के एक्स (X) अकाउंट से साझा किया गया था, जिसे लाखों बार देखा जा चुका है। यूजर्स इस वीडियो पर बेहद भावुक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह देखकर कलेजा फट गया।” वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “ये एक बेटे की जान नहीं जा रही है, साथ में मां-बाप के दिल पर भी पत्थर पड़ रहे हैं।”

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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