अब देश में ‘संचार साथी’ ऐप पर बवाल खड़ा हो गया है। हाल ही में दूरी संचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि वे अपने सभी नए स्मार्टफोन में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करके बेचें। वहीं विभाग के निर्देश में कहा गया है कि यदि कंपनियां नियमों का पालन करने में विफल रहती हैं, तो दूरसंचार अधिनियम 2023, दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम 2024 के कानूनों के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अब केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री ने साफाई दी कि ‘संचार साथी’ अनिवार्य नहीं है और उसे आप डिलीट कर सकते हैं। अब विपक्षी दलों के नेताओं ने निशाना साधा है।

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सांसद अखिलेश यादव ने इस मामले में कहा कि सरकार सभी के मोबाइल में क्या खोजबीन करना चाहती है। क्या केंद्र सरकार नॉर्थ कोरिया के किम जोंग उन के रास्ते पर चल रही है? अगर देखा जाए तो ​अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियों के कई नेता अब इस मामले में केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी साधा निशाना

संचार साथी ऐप मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार देश के नागरिकों की निगरानी करना चाहती है। ये एक जासूसी वाला ऐप है। साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए सिस्टम जरूरी है लेकिन सरकार का ताजा आदेश लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल जैसा है।

क्या है संचार साथी ऐप?

संचार साथी एप 17 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था। ये एक प्रकार का साइबर सुरक्षा उपकरण है। जिसकी सहायता से मोबाइल कनेक्शों की जांच की जा सकती है। इसमें आपको कई तरह के शानदार फीचर्स मिलते हैं। इस एप्लीकेशन की मदद से आप स्कैम कॉल की रिपोर्ट कर सकते हैं। यूजर्स अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड की पहचान कर सकते हैं। फोन चोरी होने पर उसको ब्लॉक किया जा सकता है।