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मायावती ने संसद और विधानमंडल सत्र के घटते समय पर जताई चिंता, साल में कम से कम 100 दिन सत्र चलाने की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का समय लगातार घटना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। बीएसपी प्रमुख ने कहा कि ये संस्थाएं देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं और शांतिपूर्ण व नियमबद्ध सत्रों के माध्यम से ही सरकार को जनहित के प्रति जवाबदेह बनाया जा सकता है।
मायावती ने संसद और विधानमंडल सत्र के घटते समय पर जताई चिंता, साल में कम से कम 100 दिन सत्र चलाने की मांग

Mayawati

बसपा सुप्रीमो मायावती संसद और राज्य विधानमंडलों सत्र के घटते समय को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इनके सत्रों का समय लगातार घट रहा है, साथ ही हंगामा और बार-बार स्थगन से इनकी जन उपयोगिता तेजी से कम हो रही है। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानमंडल देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं और इनकी कार्यवाही का समय लगातार घटने से लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित होती है।

उन्होंने लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के संदर्भ में इस मुद्दे पर टिप्पणी की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा है कि सरकार और विपक्ष दोनों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडल सत्र के घटते समय पर जताई चिंता

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों के समय में निरंतर गिरावट तथा हंगामेदार हालात और स्थगन के कारण इनकी जन-उपयोगिता प्रभावित हो रही है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गहरी चिंता का विषय है। उन्होंने यह बात उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन तक शांतिपूर्ण तरीके से नियमानुसार चलनी चाहिए और सरकार और विपक्ष दोनों को इस पर गंभीरता से अमल करना चाहिए।

हाईकोर्ट के फैसले की सराहना 

इसी के साथ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के हालिया फैसले का स्वागत भी किया जिसमें कहा गया है कि सरकारी मान्यता न होने पर मदरसा बंद करने का आधार नहीं बन सकता। मायावती ने कहा कि यह फैसला अति-महत्वपूर्ण और सामयिक है। उन्होने कहा कि कोई भी सरकार नीतिगत रूप से निजी मदरसों के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर कुछ अधिकारियों की मनमानी से ऐसी अप्रिय घटनाएं होती रहती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसी प्रवृत्ति पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए।