उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। आरक्षण को लेकर कानूनी दांवपेच और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इसी गहमागहमी के बीच, शुक्रवार (3 अप्रैल) को प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अतरौलिया निरीक्षण भवन में जनसुनवाई के दौरान दो टूक बयान दिए। उन्होंने जहां एक ओर पंचायत चुनाव कराने को लेकर सरकार की पूरी तैयारी और अदालत के निर्देशों का अक्षरशः पालन करने का भरोसा दिया, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी (सपा) पर अपराधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाकर सियासी सरगर्मी को और बढ़ा दिया।

हाईकोर्ट और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी सरकार

राजभर ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव से संबंधित मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से मिलने वाले सभी निर्देशों का पूरी निष्ठा और गंभीरता से पालन करेगी, जिसमें आरक्षण नीति और चुनाव की तारीखें भी शामिल होंगी। मंत्री ने आगे बताया कि चूंकि पंचायती राज विभाग सीधे उनके अधीन आता है, उन्हें जमीनी स्तर पर चल रही तैयारियों की हर छोटी-बड़ी जानकारी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार चुनाव कराने को लेकर पूरी तरह गंभीर और कटिबद्ध है, और इसमें किसी भी तरह की देरी या कोताही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग और न्यायालय के निर्देशों के बीच पूरा सामंजस्य होने की बात कहकर, सरकार का रुख पहले से ही साफ होने पर जोर दिया। यह बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, और अदालती फैसलों का चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर सीधा और व्यापक असर पड़ सकता है।

जनसुनवाई के दौरान ही ओमप्रकाश राजभर ने अपने ही सहयोगी कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के हालिया बयानों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। राजभर समुदाय से आने वाले इन दोनों नेताओं के बीच सियासी बयानबाजी प्रदेश की राजनीति में एक आम बात रही है। ओमप्रकाश राजभर ने अनिल राजभर को निशाने पर लेते हुए कहा,

“वह अभी राजनीति में नए हैं और अनुभवहीन हैं, जबकि हम उनके चच्चा हैं।”

यह टिप्पणी राजभर समुदाय के वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने और खुद को अधिक अनुभवी व प्रभावशाली नेता साबित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान राजभर नेताओं के बीच के आंतरिक शक्ति प्रदर्शन का संकेत हैं, खासकर आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए। यह दिखाता है कि राजभर समाज के भीतर भी राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई जारी है, जिसका असर गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

राजभर ने सपा पर अपराधियों को संरक्षण देने का लगाया आरोप

व्यक्तिगत टिप्पणियों और चुनाव संबंधी बयानों के बाद, ओमप्रकाश राजभर ने अपना रुख समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर मोड़ा और उस पर सीधा तथा तीखा प्रहार किया। उन्होंने आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में हुई एक घटना का हवाला दिया, जहां सपा विधायक के गनर द्वारा कथित तौर पर अवैध असलहा लहराने का मामला सामने आया था। यह घटना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही थी। इस प्रकरण को आधार बनाकर राजभर ने सपा पर अपराधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सपा अभी भी अपनी पुरानी कार्यशैली से बाज नहीं आ रही है।

मंत्री राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की यह पुरानी आदत रही है कि वह ऐसे तत्वों को बढ़ावा देती है जो कानून और शांति व्यवस्था के लिए खतरा बनते हैं। उन्होंने कहा,

“जब जनप्रतिनिधि खुद ऐसे लोगों को बढ़ावा देते हैं, तो इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।”

राजभर ने मांग की कि आजमगढ़ मामले में केवल उस गनर पर ही नहीं, जिसने अवैध असलहा लहराया था, बल्कि संबंधित सपा विधायक की भूमिका की भी गहन जांच की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि विधायक की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। राजभर का कहना था कि ऐसा करने से ही एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून सभी के लिए समान है और कोई भी व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर अपराध को बढ़ावा नहीं दे सकता।

राजभर ने सपा की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

ओमप्रकाश राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने सपा पर अपनी पुरानी ‘गुंडागर्दी’ वाली कार्यशैली से बाहर न निकल पाने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी की मानसिकता अभी भी कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है और वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए अपराधियों का सहारा लेती है। राजभर के इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दल कानून व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करते हैं, वहीं विपक्षी दल लगातार सरकार को इस मोर्चे पर घेरने का प्रयास करते रहते हैं। राजभर के इन तीखे हमलों से आने वाले दिनों में सपा और भाजपा गठबंधन के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, जिसका सीधा असर पंचायत चुनाव के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कानून व्यवस्था हमेशा से ही उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अहम मुद्दा रहा है।