उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। मऊ जिले में अपने समर्थकों और लोगों से मुलाकात के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव को ‘दगा हुआ कारतूस’ बताया। उनके इस बयान ने न सिर्फ अखिलेश के राजनीतिक असर पर सवाल उठाया, बल्कि यह भी इशारा किया कि राजभर आने वाले चुनावों में सपा को कमजोर करने की पूरी कोशिश में लगे हैं। राजभर ने दावा किया कि लाखों की संख्या में यादव मतदाता, जिन्हें सपा का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है, अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का झंडा लेकर घूम रहे हैं। यह बयान सपा के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
दरअसल राजभर ने अखिलेश यादव पर ‘नास्तिक’ होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख न तो भगवान श्रीराम को मानते हैं और न ही भगवान श्रीकृष्ण को। राजभर ने कहा कि जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक मौका आया, तब अखिलेश यादव वहां नहीं गए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश मथुरा जाने से भी बचते हैं। राजभर के मुताबिक यह बात उनके नास्तिक होने को दिखाती है। प्रदेश की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए राजभर का यह बयान सियासी गलियारों में नई बहस खड़ी कर सकता है।
गुज्जर समाज को भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण का सच्चा भक्त बताया
दरअसल अपनी जनसभा में सुभासपा प्रमुख ने गुज्जर समाज को कट्टर हिंदू और भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण का सच्चा भक्त बताया। इसी संदर्भ में उन्होंने गुज्जर समाज के महापुरुष मिहिर भोज की मूर्ति से जुड़े पुराने विवाद का भी जिक्र किया। राजभर ने कहा कि मिहिर भोज की मूर्ति को गंगाजल से धोया गया था। जब इस मामले पर पत्रकारों ने अखिलेश यादव से सवाल पूछा तो उन्होंने कोई साफ जवाब नहीं दिया और नजरें चुराते दिखाई दिए। राजभर के इस बयान का मकसद अखिलेश को ऐसे मुद्दों पर घेरना था, जिनसे वे दूरी बनाते नजर आते हैं।
समाजवादी पार्टी के अहंकार को उसकी हार की वजह बताया
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अहंकार को उसकी हार की वजह बताया। उन्होंने कहा कि सपा को अपनी ताकत को लेकर जो गलतफहमी है, वही उसे सरकार बनाने से रोक देगी। राजभर के मुताबिक सपा के अपने ही कार्यकर्ता और समर्थक पार्टी से खुश नहीं हैं और यही नाराजगी उसे सत्ता से दूर रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों यादव बीजेपी का झंडा लेकर घूम रहे हैं। यह बयान यादव समुदाय के बीच सपा की पकड़ कमजोर होने का इशारा करता है और बीजेपी की उस रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें वह गैर-यादव ओबीसी के साथ यादवों के एक हिस्से को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
एनडीए गठबंधन की ताकत का भी जिक्र किया
राजभर ने एनडीए गठबंधन की ताकत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने आप में मजबूत है, लेकिन सहयोगी दलों के साथ उसकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। राजभर ने एनडीए के प्रमुख सहयोगी नेताओं के नाम भी लिए, जिनमें राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद और खुद ओम प्रकाश राजभर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी नेताओं के पास उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में वोट दिलाने की क्षमता है, जिससे एनडीए को चुनाव में फायदा मिल सकता है।
अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा के पास ऐसा कौन सा नेता है जो सामने दिखाई देता हो। राजभर ने कहा कि जब नेतृत्व ही मजबूत नहीं होगा तो सरकार कैसे बनेगी। उन्होंने एक कहावत का भी जिक्र किया, “जस करनी बस भोग विधाता नर्क जात कहे पछताता।” इस कहावत के जरिए उन्होंने कहा कि सपा आज अपने पुराने फैसलों का परिणाम भुगत रही है।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की रैलियों के संदर्भ में एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गुज्जर समुदाय का बहिष्कार कर रही है। राजभर ने सोशल मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि अगर गुज्जर समाज उनका समर्थन करता है तो फिर उसका बहिष्कार क्यों किया जा रहा है। राजभर का यह बयान गुज्जर समुदाय को सपा से दूर करने और उन्हें बीजेपी तथा एनडीए के करीब लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गुज्जर समाज को कट्टर हिंदू बताकर उन्होंने उन्हें बीजेपी के एजेंडे से जोड़ने की भी कोशिश की।
राजभर के ये बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकते हैं। सपा और अखिलेश यादव पर लगातार हमले करके राजभर ने बीजेपी के लिए सियासी माहौल बनाने की कोशिश की है। धार्मिक मुद्दों, वोट बैंक और नेतृत्व पर सवाल उठाकर उन्होंने सपा को घेरने की रणनीति अपनाई है। आने वाले समय में इन बयानों पर सपा की प्रतिक्रिया और प्रदेश की राजनीति पर उनके असर पर सबकी नजर रहेगी।






