इंदौर के रालामंडल बायपास ब्रिज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तीन साल में बनकर तैयार हुआ यह ब्रिज, जिसे हाल ही में ट्रैफिक के लिए खोला गया था, अब दोबारा बंद कर दिया गया है। वजह है तकनीकी खामियां और अधूरा काम, जिसे अब तोड़फोड़ कर ठीक किया जा रहा है।
शहर में ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए बनाए गए इस ब्रिज ने राहत देने के बजाय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। रोज इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को अब फिर से सर्विस रोड का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां जाम और दबाव दोनों बढ़ गए हैं।
जल्दबाजी में खोला गया ट्रैफिक
रालामंडल बायपास ब्रिज को ट्रैफिक के लिए खोलने में अधिकारियों ने जल्दबाजी दिखाई। बिना पूरी तरह काम खत्म किए ही इसे शुरू कर दिया गया। लोकार्पण से पहले ही वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई, जिससे बाद में खामियां सामने आने लगीं।
इस तरह की जल्दबाजी कई बार बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी पड़ जाती है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ। ब्रिज पूरी तरह तैयार नहीं था, फिर भी ट्रैफिक शुरू कर दिया गया, जिससे अब सुधार के लिए इसे बंद करना पड़ा।
तकनीकी खामियां बनी बड़ी वजह
रालामंडल बायपास ब्रिज में सबसे बड़ी समस्या उसकी डिजाइन और निर्माण से जुड़ी खामियां हैं। एक भुजा की रेलिंग का कर्व सड़क से करीब आधा फीट ऊंचा बना दिया गया, जो वाहनों के लिए खतरा बन सकता था।
अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो हादसे होने की संभावना बढ़ जाती। यही कारण है कि अधिकारियों ने बाद में इस हिस्से को तोड़कर सुधार करने का फैसला लिया।
इसके अलावा ब्रिज के कुछ हिस्सों में कर्व फुटपाथ जैसे नजर आ रहे हैं, जबकि हाईवे ब्रिज पर आमतौर पर ऐसा नहीं होता। यह डिजाइन की बड़ी गलती मानी जा रही है।
बार-बार बंद हो रहा ब्रिज, बढ़ी लोगों की परेशानी
रालामंडल बायपास ब्रिज को पहले आंशिक रूप से बंद किया गया, फिर कुछ समय बाद दोनों लेन खोल दी गईं। लेकिन अब फिर से दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद कर दी गई हैं। इस बार-बार के बदलाव से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। कभी ब्रिज खुलता है, कभी बंद हो जाता है, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट भी प्रभावित हो रहा है।
वाहन चालकों को मजबूरन सर्विस रोड का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जहां पहले से ही भारी वाहनों का दबाव है। इससे जाम की स्थिति बन रही है और यात्रा का समय बढ़ रहा है।
40 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा काम
इस ब्रिज के निर्माण पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। बावजूद इसके, इसमें इतनी बड़ी खामियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
प्रोजेक्ट की समय सीमा भी पूरी नहीं हो पाई। एक साल में बनने वाला यह ब्रिज तीन साल में तैयार हुआ, और फिर भी इसमें सुधार की जरूरत पड़ रही है। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया।
रालामंडल ब्रिज का महत्व और ट्रैफिक पर असर
रालामंडल बायपास ब्रिज इंदौर के ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए बनाया गया था। इसका उद्देश्य था कि भारी वाहनों को आसानी से रास्ता मिले और शहर के अंदर ट्रैफिक कम हो। लेकिन अब ब्रिज के बंद होने से उल्टा असर पड़ रहा है। सर्विस रोड पर ट्रैफिक बढ़ गया है और लोगों को लंबा समय लग रहा है।






