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इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में 7 अप्रैल को 80 हजार भक्तों के लिए महाभोज, इस बार होगा चलित भंडारा

Written by:Rishabh Namdev
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इंदौर के प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में 7 अप्रैल को 80 हजार भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। दरअसल यह भंडारा हनुमान जन्मोत्सव के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होता है और इस बार इसका स्वरूप चलित रखा गया है।
इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में 7 अप्रैल को 80 हजार भक्तों के लिए महाभोज, इस बार होगा चलित भंडारा

इंदौर के प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में 7 अप्रैल को करीब 80 हजार भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। दरअसल यह भंडारा हनुमान जन्मोत्सव के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होता है। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों के लिए प्रसाद तैयार किया जाएगा। वहीं मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था को आसान बनाने के लिए चलित भंडारे की व्यवस्था की है, जिससे भक्त प्रसाद पैकेट में लेकर घर जा सकेंगे या बाहर खड़े होकर खा सकेंगे।

दरअसल मंदिर में भंडारे की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 6 अप्रैल की सुबह भट्टी पूजन के साथ ही प्रसाद बनाने का काम मंदिर परिसर में शुरू होगा। इसके बाद बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जाएगा ताकि आने वाले सभी भक्तों को प्रसाद मिल सके।

हर साल हनुमान जन्मोत्सव के बाद होता है भंडारा

रणजीत हनुमान मंदिर में हर साल हनुमान जन्मोत्सव के बाद आने वाले पहले मंगलवार को भंडारा आयोजित किया जाता है। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है। मंदिर में साल में दो बार भंडारा होता है, एक हनुमान जन्मोत्सव के बाद और दूसरा आंवला नवमी के अवसर पर। पहले भंडारे में भक्तों को मंदिर परिसर में बैठाकर प्रसाद दिया जाता था। उस समय महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था रहती थी। लेकिन इस व्यवस्था में मंदिर के बाहर काफी भीड़ जमा हो जाती थी। कई बार भक्तों को प्रसाद लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और धक्का-मुक्की भी हो जाती थी। इसी वजह से मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था में बदलाव किया और चलित भंडारे की शुरुआत की।

हाथ में थाली का पैकेट दिया जाता है

चलित भंडारे में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइनें लगाई जाती हैं। जैसे ही भक्त मंदिर परिसर में पहुंचते हैं, उन्हें हाथ में थाली का पैकेट दिया जाता है। आगे बढ़ते हुए उसमें पुड़ी, सब्जी, भजिए और नुक्ति का प्रसाद रखा जाता है। प्रसाद लेने के बाद भक्त पैकेट को बंद करके घर ले जा सकते हैं या परिसर के बाहर खड़े होकर खा सकते हैं। इस व्यवस्था से भीड़ कम होती है और भक्तों को ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ता।

मंदिर के पुजारी पंडित दीपेश व्यास ने बताया कि 6 अप्रैल को भट्टी पूजन के बाद भंडारे की तैयारियां तेज हो जाएंगी। मंदिर में अलग-अलग जगहों से सब्जियां लाई जाएंगी। महिला मंडल की सदस्य सब्जियां साफ करने और काटने का काम करेंगी। इसके साथ ही नुक्ति और रामभाजी बनाने का काम भी शुरू होगा। भंडारे के लिए सभी व्यंजन बड़े पैमाने पर तैयार किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल को भगवान को भोग लगाने और आरती के बाद शाम करीब 6:30 बजे से भंडारे की शुरुआत होगी। इस बार लगभग 80 हजार भक्तों के लिए प्रसाद तैयार किया जाएगा। प्रसाद में पुड़ी, रामभाजी, नुक्ति और भजिए शामिल होंगे। इतने बड़े भंडारे के लिए करीब 80 क्विंटल आटा, 15 क्विंटल बेसन, 90 डिब्बे शुद्ध घी और 200 डिब्बे मूंगफली का तेल इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि सभी भक्तों को आसानी से प्रसाद मिल सके, इसके लिए पूरी व्यवस्था पहले से की जा रही है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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