राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के टिकट के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इस बढ़ोतरी के बाद अब देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां घूमने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। वन विभाग ने सफारी टिकट की कीमतों में करीब 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। नई दरें लागू होने के बाद पर्यटकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिससे रणथंभौर के पर्यटन कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह फैसला उन पर्यटकों के लिए झटका माना जा रहा है जो प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से देखने के लिए रणथंभौर आते हैं।
दरअसल वन विभाग का कहना है कि पार्क का रखरखाव, वन्यजीवों का संरक्षण और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं देना उनकी प्राथमिकता है। इन कामों के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है, इसलिए शुल्क बढ़ाया गया है। हालांकि कई पर्यटक इस फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि रणथंभौर की सफारी पहले से ही काफी महंगी थी और अब कीमत बढ़ने से आम लोगों के लिए यहां घूमना और मुश्किल हो जाएगा। कुछ पर्यटकों का यह भी कहना है कि अगर इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं तो वे दूसरे सस्ते पर्यटन स्थलों का रुख कर सकते हैं।
सफारी टिकट की नई दरें क्या हैं, कितना बढ़ा बोझ
नई दरों के अनुसार जिप्सी (6 सीटर) और कैंटर (20 सीटर) दोनों सफारी के टिकट पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं। खासकर विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क में ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग के दौरान लगने वाले अतिरिक्त शुल्क में भी वृद्धि की गई है, जिससे कुल खर्च और बढ़ जाता है। परिवार के साथ रणथंभौर घूमने आने वाले पर्यटकों को अब पहले से ज्यादा बजट बनाना पड़ेगा।
कैंटर सफारी (20 सीटर) के लिए टिकट की कीमतों में यह बदलाव हुआ
भारतीय पर्यटक: पहले प्रति व्यक्ति 888 रुपये देने पड़ते थे, जो अब बढ़कर 986.63 रुपये हो गए हैं। यानी करीब 98.63 रुपये की बढ़ोतरी।
विदेशी पर्यटक: पहले 2176.10 रुपये प्रति व्यक्ति थे, जो अब बढ़कर 2399.63 रुपये हो गए हैं। यानी करीब 223.53 रुपये ज्यादा।
जिप्सी सफारी (6 सीटर) के लिए भी कीमत बढ़ाई गई
भारतीय पर्यटक: पहले 1455.17 रुपये प्रति व्यक्ति थे, अब 1611.80 रुपये देने होंगे। यानी करीब 156.63 रुपये की बढ़ोतरी।
विदेशी पर्यटक: पहले 2743.17 रुपये प्रति व्यक्ति थे, अब 3024.80 रुपये देने होंगे। यानी करीब 281.63 रुपये ज्यादा।
इन आंकड़ों से साफ है कि हर टिकट पर करीब 98 रुपये से लेकर 281 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। औसतन यह बढ़ोतरी 100 से 300 रुपये के बीच है। ऐसे में परिवार के साथ घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए कुल खर्च काफी बढ़ सकता है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पर्यटन उद्योग कोविड महामारी के बाद धीरे-धीरे संभल रहा है।
कई पर्यटकों का कहना है कि रणथंभौर की सफारी हमेशा से एक प्रीमियम अनुभव मानी जाती रही है और इसकी कीमतें दूसरे टाइगर रिजर्व से पहले ही ज्यादा थीं। अब नई बढ़ोतरी के बाद यह आम भारतीय पर्यटकों की पहुंच से और दूर हो सकता है। उनका मानना है कि अगर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है तो इस तरह की कीमत बढ़ोतरी उसके उलट असर डाल सकती है।
स्थानीय पर्यटन कारोबार पर असर
टिकट की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों पर भी पड़ सकता है। रणथंभौर इलाके के होटल मालिक, स्थानीय गाइड और ट्रैवल एजेंट इस फैसले से चिंतित हैं। उनका कहना है कि टिकट महंगे होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो सकती है, जिससे उनके कारोबार पर असर पड़ेगा।
रणथंभौर का पर्यटन काफी हद तक जंगल सफारी पर ही निर्भर करता है। पर्यटक यहां मुख्य रूप से बाघ और अन्य वन्यजीव देखने आते हैं और इसके लिए सफारी जरूरी होती है। ऐसे में टिकट महंगे होने से पूरा पर्यटन तंत्र प्रभावित हो सकता है। अगर पर्यटक कम आएंगे तो होटल बुकिंग घटेगी, गाइड्स को काम कम मिलेगा और ट्रैवल एजेंसियों को भी नुकसान होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
भीड़ नियंत्रण और संरक्षण का विभाग का तर्क
वन विभाग का कहना है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को बचाना सबसे जरूरी है। जंगल में ज्यादा पर्यटक जाने से वन्यजीवों को परेशानी हो सकती है और उनके व्यवहार पर असर पड़ सकता है।
विभाग के मुताबिक जंगल में सीमित संख्या में ही पर्यटकों को जाने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में शुल्क बढ़ने से भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। उनका मानना है कि ज्यादा कीमत होने से वही पर्यटक आएंगे जो वास्तव में वन्यजीवों और प्रकृति का सम्मान करते हैं। इससे जंगल में हलचल कम होगी और जानवरों को शांति मिलेगी।
इसके अलावा टिकट से मिलने वाली अतिरिक्त राशि का उपयोग वन्यजीव संरक्षण के कामों में किया जाएगा। इसमें शिकार रोकने के अभियान, जंगल का रखरखाव, पशु चिकित्सा देखभाल और पार्क की सुविधाएं बेहतर करना शामिल है। विभाग का कहना है कि यह कदम लंबे समय में रणथंभौर के वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
फिलहाल टिकट की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी को लेकर पर्यटकों और स्थानीय कारोबारियों में असंतोष देखा जा रहा है। एक तरफ पर्यटक अपनी जेब पर पड़े बोझ से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कारोबारी अपने व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस फैसले का रणथंभौर के पर्यटन पर कितना असर पड़ता है।






