इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के विलय (पेयरिंग) के मामले में सुनवाई हुई। योगी सरकार ने अपने पूरक शपथ पत्र में स्पष्ट किया कि एक किलोमीटर से कम दूरी वाले और 49 से अधिक छात्रों वाले प्राथमिक स्कूलों का विलय नहीं किया जाएगा। साथ ही, तीन किलोमीटर से अधिक दूरी वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों को भी विलय से छूट दी गई है। कोर्ट ने इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है।
योगी सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में 27 अगस्त के शासनादेश का हवाला दिया गया, जिसमें सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एक किलोमीटर से अधिक दूरी वाले प्राथमिक और तीन किलोमीटर से अधिक दूरी वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों की पेयरिंग को रद्द किया जाए। सीतापुर जिले में नए दिशानिर्देशों के तहत केवल 77 स्कूलों का विलय किया गया है। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
स्कूल भवनों में बाल वाटिकाएं शुरू
प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के खाली भवनों का उपयोग अब बाल वाटिकाओं के लिए किया जा रहा है। राज्य में 5,118 ऐसे स्कूल भवनों में बाल वाटिकाएं शुरू की गई हैं, जिससे कुल बाल वाटिकाओं की संख्या 70,000 से अधिक हो गई है। यह पहल कम छात्रों वाले स्कूलों के बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है और छोटे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की उपलब्धता
न्यायमूर्ति राजन रॉय और मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सरकार के जवाब को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए समय निर्धारित किया। यह मामला उत्तर प्रदेश में स्कूलों के विलय की नीति और इसके प्रभावों पर चर्चा को और गहरा करेगा। सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की उपलब्धता को बनाए रखने पर केंद्रित है।





