राम मंदिर ट्रस्ट अब फोकस बदल रहा है निर्माण से संचालन की ओर। अयोध्या में शनिवार को भवन निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन यह साफ संकेत मिला कि आने वाले महीनों में श्रद्धालुओं की सुविधाएं, दर्शन प्रबंधन और रखरखाव सबसे बड़े एजेंडे में रहेंगे।
बैठक से पहले समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया को बताया कि शुक्रवार की बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर विस्तार से चर्चा हुई थी। कार्यक्रम की रूपरेखा, मंदिर परिसर में मूवमेंट, निरीक्षण बिंदु और व्यवस्थाओं पर अलग-अलग स्तर पर मंथन किया गया।
प्रस्तावित शेड्यूल के मुताबिक राष्ट्रपति का काफिला 19 मार्च को सुबह करीब 11 बजे राम जन्मभूमि मंदिर परिसर पहुंचेगा और दोपहर करीब 3 बजे तक वहीं रहेगा। प्रशासनिक स्तर पर इस अवधि के लिए अलग दर्शन व्यवस्था भी तैयार की जा रही है ताकि कार्यक्रम और आम श्रद्धालु प्रबंधन दोनों साथ चल सकें।
निर्माण का अंतिम चरण: सिर्फ दो काम बाकी
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि पूरे परिसर में अब केवल दो निर्माण कार्य शेष हैं-हुतात्मा स्मारक और अस्थायी मंदिर। बाकी अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राम मंदिर परिसर में अब केवल दो निर्माण कार्य शेष हैं, बाकी काम ट्रस्ट को सौंपने की प्रक्रिया में हैं।- नृपेंद्र मिश्रा
उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होना एक चरण है, लेकिन अब असली चुनौती परिसरों के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव की है। इसी संदर्भ में अलग-अलग कार्यदायी संस्थाओं के साथ 3 से 5 वर्ष तक के मेंटेनेंस अनुबंध किए गए हैं।
रामलला के सूर्य तिलक की परंपरा को तकनीकी रूप से निर्बाध बनाए रखने के लिए भी व्यवस्था तय की गई है। इस काम के लिए केंद्रीय बिल्डिंग रिसर्च यूनिट और सहयोगी कंपनी ऑप्टिका के साथ 10 वर्ष का अनुबंध किया गया है, ताकि हर साल रामनवमी पर सूर्य किरणों से तिलक की प्रक्रिया बिना व्यवधान पूरी हो सके।
मई तक L&T और TCS समेटेंगी साइट का काम
समिति अध्यक्ष के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लार्सन एंड टूब्रो (L&T) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) मई तक परिसर से अपना साइट-ऑपरेशन समेट लेंगी। हालांकि तकनीकी समर्थन पूरी तरह तुरंत खत्म नहीं होगा।
रखरखाव के उद्देश्य से कार्यदायी एजेंसियों के 3 से 4 विशेषज्ञ अगले दो वर्षों तक परिसर में तैनात रहेंगे। इसका उद्देश्य यह है कि नए सिस्टम, संरचनात्मक इकाइयों और धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं में संक्रमण काल के दौरान कोई बाधा न आए।
राष्ट्रपति कार्यक्रम के बाद दर्शन दायरे में विस्तार की तैयारी
ट्रस्ट ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बाद परकोटा सहित परिसर में बने सभी मंदिरों के दर्शन आम राम भक्तों के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। नई व्यवस्था लागू होने पर पास की उपलब्धता के आधार पर प्रतिदिन करीब 5,000 श्रद्धालु परकोटा समेत सभी मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे।
ट्रस्ट की प्राथमिकता सूची में श्रद्धालुओं के सामान की सुरक्षित व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं और शहर स्तर की यातायात/सहायक व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। यानी अगला चरण केवल निर्माण का नहीं, बल्कि उच्च आवागमन वाले तीर्थ परिसर के व्यवस्थित संचालन का होगा।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे में मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों को भी आमंत्रित किया गया है। प्रशासन के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले श्रमिकों से राष्ट्रपति की मुलाकात भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेगी।





