संत प्रेमानंद महाराज के 24 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की वृंदावन में इमारत से गिरकर हुई दर्दनाक मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जबलपुर के रहने वाले इस युवा साधु की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए अब उनके परिजनों ने CBI जांच की मांग उठाई है। परिजनों का साफ कहना है कि दीपक कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता, इसलिए इस पूरी घटना के पीछे किसी गहरी साजिश या अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सेना में जाने का सपना टूटा

मूल रूप से जबलपुर के गौर क्षेत्र स्थित परसवाड़ा गांव के रहने वाले दीपक लोधी बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थे और देश सेवा के लिए भारतीय सेना में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने सेना में भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा भी दी थी, लेकिन दौड़ में अनफिट होने के बाद उनका यह सपना टूट गया। इसके बाद जबलपुर में दादा गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने मां नर्मदा की कठिन परिक्रमा पूरी की। इस परिक्रमा के दौरान ही उनका मन सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो गया और वे वृंदावन चले गए।

साल 2024 में ली थी प्रेमानंद महाराज से दीक्षा

वृंदावन पहुंचने के बाद साल 2024 में उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ग्रहण की और पूरी तरह से प्रभु भक्ति में लीन हो गए। दीक्षा के बाद उनका नया नाम ‘रसिक दुलारी शरण’ रखा गया था। भगवान की साधना और पूजा-पाठ में कोई बाधा न आए, इसलिए उन्होंने मोबाइल फोन का इस्तेमाल तक पूरी तरह से बंद कर दिया था। परिजनों ने बताया कि वे कई बार उनसे मिलने वृंदावन गए भी थे, लेकिन साधना के नियमों के कारण उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी।

घर में छाया मातम और आक्रोश

इमारत से गिरकर हुई संदिग्ध मौत की खबर जैसे ही जबलपुर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की बड़ी मां बिल्लोबाई और चाचा प्रेमलाल लोधी तुरंत परिजनों के साथ वृंदावन पहुंचे। परिजनों का कहना है कि हमेशा भक्ति भाव में डूबा रहने वाला युवक कभी ऐसा खौफनाक कदम नहीं उठा सकता। परिजनों का मानना है कि मामले की तह तक पहुंचने और सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच ही एकमात्र रास्ता है, जिससे मृतक को न्याय मिल सकेगा।