देश में गोमाता के नाम पर मात्र राजनीति करने और अयोध्या राम मंदिर के ट्रस्ट को फर्जी करार देने का आरोप लगाते हुए ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भाजपा की वास्तविक मंशा गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की होती तो अब तक इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा चुके होते, क्योंकि गाय के नाम पर वोट लेकर सत्ता प्राप्त करना एक अलग बात है और उसे राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास करना बिल्कुल अलग विषय है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सिकंदरा के नीरव कुंज में आयोजित गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे, जिसका आयोजन अखिल भारतीय हिंदू महासभा द्वारा किया गया था। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहा कि गोमाता को राष्ट्रमाता बनाने का यह अभियान केवल किसी एक संगठन अथवा व्यक्ति के प्रयासों से ही सफल नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों को, विशेष रूप से युवाओं को, आगे आना होगा और जब तक इस मांग को एक वृहद जनआंदोलन का स्वरूप नहीं दिया जाएगा, तब तक इस पवित्र उद्देश्य को पूरा कर पाना अत्यंत कठिन है। वर्तमान सरकार से इस संबंध में अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती है, ऐसा शंकराचार्य ने अपनी बात में जोड़ा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में संयोजक सचिन चतुर्वेदी, नजीर अहमद, शंभुनाथ चौबे, राकेश अग्रवाल, पल्लवी महाजन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट को बताया फर्जी
अपने वक्तव्य के दौरान शंकराचार्य ने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर कटाक्ष किया। उन्होंने यह आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर का पूरा ट्रस्ट ही फर्जी है, और इस ट्रस्ट के गठन में पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं की जानबूझकर अनदेखी की गई है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि मंदिर निर्माण से पहले भूमि खरीद में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए थे, और इन आरोपों पर उचित संज्ञान नहीं लिया गया, जिससे ट्रस्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा संचालित 81 दिवसीय गविष्टि यात्रा का सोमवार को आवास विकास कॉलोनी स्थित सेंट्रल पार्क में भव्य स्वागत किया गया, जहाँ भारी संख्या में गोभक्तों, संतों और प्रबुद्धजनों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की, जो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की एक अनूठी मिसाल पेश करती है। समाज के इन प्रतिनिधियों ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के समर्थन में विभिन्न पोस्टर प्रदर्शित किए, जिससे यह संदेश गया कि यह केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।
धार्मिक से आगे बढ़कर गो-रक्षा का व्यापक महत्व बताया गया
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि गो-रक्षा केवल एक धार्मिक विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। प्राचीन कैलाश मंदिर के महंत गौरव गिरी, महंत सुभाष गिरी और रावली मंदिर के महंत अभिषेक कृष्ण पाराशर ने अपने संबोधन में कहा कि यह गविष्टि यात्रा सनातन मूल्यों को पुनः स्थापित करने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस कार्यक्रम में सैफ अली अब्बास, सलमान कुरैशी, संजय यादव, अमित जादौन, राहुल चतुर्वेदी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे और संयोजक डॉ. मदन मोहन शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
अपनी 81 दिवसीय गविष्टि यात्रा के दौरान, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की जीवनी ‘देदीप्यमान द्विपीठाधीश्वर’ का विमोचन भी किया। इस पुस्तक की लेखिका डॉ. दीपिका उपाध्याय ने विमोचन के अवसर पर कहा कि ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर के विराट व्यक्तित्व को सीमित पृष्ठों में समेटना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि एक संन्यासी का जीवन समाज और धर्म की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित होता है, परंतु उस त्याग के पीछे उनकी माता का मौन त्याग भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। पुस्तक में ऐसे ही गहरे भावों और जीवन मूल्यों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया है, ऐसा डॉ. उपाध्याय ने बताया। शंकराचार्य ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को अपना आशीर्वाद प्रदान किया और उसके उपरांत सिकंदरा की ओर प्रस्थान किया।





