भाजपा की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का नाम बदलने की मांग उठाकर एक बार फिर विवाद को हवा दी है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक जिले का नाम किसी स्वतंत्रता सेनानी, संत या समाज सुधारक के नाम पर होना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक हो। उमा भारती ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे ‘गुलामी से जुड़े नामों’ का समर्थन कर वोट बैंक की राजनीति करते हैं और जनता की भावनाओं की कद्र नहीं करते। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
उमा भारती ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों पर तीखा जवाब दिया। राहुल द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था है, जो सभी शिकायतों की जांच करता है। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी कि अगर जनता उन्हें वोट नहीं दे रही, तो उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए, न कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना चाहिए। उमा भारती ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए उनकी विश्वसनीयता को चुनौती दी।
बिहार में कांग्रेस की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ शुरू
इस बीच, बिहार में कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ शुरू की है। यह 16 दिन की यात्रा 20 से अधिक जिलों से होकर गुजरेगी और 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। यात्रा की शुरुआत रविवार को सासाराम से हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, कन्हैया कुमार सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इस दौरान राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी हिस्सा लिया और भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
उमा भारती की मांग और उनके बयानों ने जहां उत्तर प्रदेश में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है, वहीं बिहार में कांग्रेस की यात्रा विपक्ष की रणनीति को दर्शाती है। शाहजहांपुर का नाम बदलने की मांग पर विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस की यात्रा भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता को मजबूत करने का प्रयास है। दोनों घटनाक्रमों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।





