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UP SI भर्ती परीक्षा 2026 में पूछे गए सवाल पर विवाद, बीजेपी नेता ने CM योगी को लिखा पत्र, कार्रवाई की मांग, जानें पूरा मामला

Written by:Gaurav Sharma
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उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में 'अवसर के अनुसार बदल जाने वाले' के लिए पूछे गए एक सवाल के विकल्पों में 'पंडित' शब्द को शामिल करने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूपी बीजेपी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इसे एक समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास बताया है।
UP SI भर्ती परीक्षा 2026 में पूछे गए सवाल पर विवाद, बीजेपी नेता ने CM योगी को लिखा पत्र, कार्रवाई की मांग, जानें पूरा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 14 मार्च 2026 को हुई सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा अब एक सवाल को लेकर विवादों में घिर गई है। परीक्षा के हिंदी खंड में पूछे गए एक प्रश्न और उसके विकल्पों ने एक राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसके बाद प्रदेश सरकार से कार्रवाई की मांग की जा रही है।

विवाद का केंद्र बना सवाल था- ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द में उत्तर दें।’ इस प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए थे: 1- पंडित, 2- अवसरवादी, 3- निष्कपट और 4- सदाचारी। सही उत्तर ‘अवसरवादी’ होते हुए भी, विकल्प के तौर पर ‘पंडित’ शब्द को शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।

BJP नेता ने सीएम योगी को लिखा पत्र

इस मामले पर उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया है। अपने पत्र में, मिश्र ने इस प्रश्न को ‘बेहद आपत्तिजनक और संवेदनशील’ करार दिया है।

उन्होंने लिखा कि यह सवाल न केवल गलत तरीके से बनाया गया है, बल्कि एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है।

“पंडित शब्द विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है, इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना पूरी तरह अनुचित, असंवेदनशील और संभवतः जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है।”- अभिजात मिश्र, प्रदेश मंत्री, यूपी बीजेपी

‘सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश’

अभिजात मिश्र ने अपने पत्र में इसे सरकार की छवि को धूमिल करने और जातीय तनाव पैदा करने की एक कोशिश बताया। उन्होंने कहा, “यह न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकार की छवि को धूमिल करने, जातीय तनाव पैदा करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास भी लगता है।”

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रश्न पत्र तैयार करने वाली कमेटी और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, उन्होंने इस प्रश्न को आधिकारिक रूप से रद्द करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का भी अनुरोध किया है।

सोशल मीडिया पर भी गरमाया मुद्दा

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इस तरह के प्रश्न सामाजिक वैमनस्यता को बढ़ावा दे सकते हैं। लोगों ने गृह मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में इस तरह की असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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