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उत्तर प्रदेश में अलविदा जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न, गोरखपुर से मुरादाबाद तक मस्जिदों में मुल्क की तरक्की के लिए उठी दुआएं

Written by:Ankita Chourdia
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माह-ए-रमजान के आखिरी जुमे (अलविदा) पर उत्तर प्रदेश की सभी मस्जिदों में भारी भीड़ के बीच नमाज अदा की गई। इस दौरान नमाजियों ने मुल्क में अमन, शांति और तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी। मुरादाबाद जैसे शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखी गई, जबकि गोरखपुर में एक अलग ही माहौल रहा।
उत्तर प्रदेश में अलविदा जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न, गोरखपुर से मुरादाबाद तक मस्जिदों में मुल्क की तरक्की के लिए उठी दुआएं

रमजान के पाक महीने के अंतिम शुक्रवार, जिसे ‘अलविदा जुमा’ या ‘जुमातुल विदा’ भी कहा जाता है, के मौके पर पूरे उत्तर प्रदेश की मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भर गईं। प्रदेश भर में अलविदा जुमे की नमाज अमन और शांति के साथ अदा की गई। नमाज के बाद लाखों हाथ मुल्क की खुशहाली, तरक्की, अमन-चैन और भाईचारे के लिए दुआ में उठे।

लोगों के चेहरों पर जहां रमजान के महीने के खत्म होने का गम था, वहीं ईद के आने की खुशी भी झलक रही थी। मस्जिदों में इमाम और उलमा ने अपनी तकरीरों में जकात, फित्रा और शबे कद्र की अहमियत पर रोशनी डाली और लोगों से ईद की नमाज से पहले इन्हें अदा करने की अपील की।

मुरादाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

संवेदनशील माने जाने वाले मुरादाबाद में अलविदा जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर से लेकर देहात तक की सभी मस्जिदों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। खुद एसएसपी सतपाल अंतिल और जिलाधिकारी अनुज सिंह सड़कों पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। यहां मस्जिदों में नमाजियों ने देश में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए खास दुआएं कीं।

गोरखपुर में दिखा ईद जैसा माहौल

गोरखपुर में अलविदा जुमे पर ईद जैसा माहौल देखने को मिला। यहां की रसूलपुर जामा मस्जिद के पास ‘अल कलम एसोसिएशन’ की ओर से एक अनोखी पहल की गई। एसोसिएशन ने ‘किताबें बुला रही हैं’ नाम से दीनी किताबों का एक स्टॉल लगाया, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखा। इस आयोजन में मौलाना मुहम्मद शादाब, मुजफ्फर हसनैन रूमी, मिनहाजुद्दीन अंसारी और सैयद नदीम अहमद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुबह से ही शुरू हो गई थीं तैयारियां

अलविदा जुमे को लेकर मुस्लिम समुदाय में सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी। लोगों ने सुबह उठकर गुस्ल (स्नान) किया, बेहतरीन कपड़े पहने और इत्र लगाकर मस्जिदों का रुख किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई पहली सफ (पंक्ति) में जगह पाने की कोशिश में था। अजान होने से काफी पहले ही कई मस्जिदें पूरी तरह भर चुकी थीं।

शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने और ईद की खरीदारी के लिए शहरों में पहुंचे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई मस्जिदों में जगह कम पड़ गई, जिसके बाद लोगों ने छतों और बाहर सड़कों पर चटाई बिछाकर नमाज अदा की। मस्जिद कमेटियों ने भी नमाजियों की सुविधा के लिए शामियाना, पानी और अतिरिक्त दरियों का इंतजाम किया था।

Ankita Chourdia
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