MP Breaking News
Google पर फॉलो करें

SC-ST अत्याचार के लंबित मामलों पर उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश, बोले- पीड़ित को न्याय के लिए न भटकना पड़े

अनुसूचित जाति-जनतजाति अत्याचार के लंबे समय से अटके और गंभीर मामलों की पुलिस जांच से लेकर कोर्ट में सुनवाई तक नियमित समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राहत राशि में देरी के मामलों को अलग से देखने और पीड़ित परिवारों को इलाज, सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई व पुनर्वास में मदद के निर्देश दिए हैं।
CM Pushkar Singh Dhami

CM Pushkar Singh Dhami

SC-ST अत्याचार के लंबित मामलों को लेकर उत्तराखंड सरकार अब पुलिस जांच से लेकर कोर्ट में चल रही सुनवाई तक हर कदम की नियमित समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खासकर लंबे समय से अटके और गंभीर मामलों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पीड़ितों को मिलने वाली राहत राशि में देरी के मामलों को भी अलग से देखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर परिवार को इलाज, सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई और पुनर्वास में भी मदद दी जाएगी।

मुख्यमंत्री मंगलवार को सचिवालय में SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर बनी राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक ले रहे थे। इस दौरान वर्ष 2024 से अब तक लंबित पुलिस जांच का मुद्दा सामने आया तो उन्होंने देरी की वजह की समीक्षा कर मामलों को समय पर पूरा करने को कहा। लंबे समय से अटके गंभीर मामलों में पुलिस और प्रशासन के साथ सरकारी वकील भी तालमेल बनाकर काम करेंगे, वहीं विशेष न्यायालयों में चल रहे पुराने मामलों की नियमित समीक्षा के साथ जरूरत पड़ने पर विशेष सरकारी वकील उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने दिए अहम निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा कि पूरी कवायद सिर्फ मामलों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, पीड़ित को समय पर न्याय और मदद मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी के चलते राहत राशि के भुगतान में देरी न करने और जहां पहले से देरी हुई है, उन मामलों को अलग से देखने के निर्देश दिए गए हैं।

आर्थिक मदद देकर खत्म नहीं होगी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने बैठक में पीड़ित परिवारों की मदद का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिवार को आर्थिक मदद देने के बाद मामला खत्म नहीं माना जाए, जरूरत के मुताबिक इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। घटना के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो उन्हें छात्रवृत्ति और दूसरी शैक्षणिक योजनाओं से भी जोड़ा जाए।

गंभीर और संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए जरूरत के मुताबिक काउंसलिंग और पुनर्वास में भी मदद देने को कहा गया है। हर जिले में ऐसे मामलों पर वरिष्ठ स्तर से नजर रखी जाएगी, ताकि जांच या राहत के मामले लंबे समय तक अटके न रहें।

मामलों पर नजर रखने के लिए बनेगा डिजिटल सिस्टम

SC-ST अत्याचार से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर भी काम होगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस जांच, कोर्ट में मामले की स्थिति, राहत राशि और पीड़ित को मिलने वाली दूसरी मदद की शासन स्तर पर निगरानी के लिए यह सिस्टम विकसित करने को कहा है। जिन जिलों में जांच, मामलों के निपटारे या राहत देने में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा होगी।

पीड़ित के साथ पुलिस का व्यवहार भी बैठक में चर्चा का हिस्सा रहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कानून के प्रावधानों और संवेदनशील मामलों की जांच को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा है। वहीं गांव और दूरदराज के इलाकों में लोगों को उनके कानूनी अधिकार और पीड़ितों को मिलने वाली मदद की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के आखिर में अधिकारियों से कहा कि लिए गए फैसले केवल कागजों तक सीमित न रहें। हर फैसले के लिए जिम्मेदारी और समय तय हो और उसकी नियमित समीक्षा की जाए, ताकि पीड़ित को न्याय और मदद के लिए भटकना न पड़े।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
Follow Us :GoogleNews
SC-ST अत्याचार के लंबित मामलों पर उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश, बोले- पीड़ित को न्याय के लिए न भटकना पड़े