उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र संपन्न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार हमला किया है। कांग्रेस का कहना है कि यह सत्र लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं चलाया गया।
देहरादून में एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार ने स्थापित प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर काम किया। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि जिस दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ, उसी दिन बजट भी पेश कर दिया गया, जो कि एक अभूतपूर्व और गलत परंपरा है।
‘संसदीय मूल्यों का हुआ उल्लंघन’
यशपाल आर्य ने प्रक्रिया की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि आमतौर पर राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा होती है और उसके बाद ही बजट पेश किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया, “इस बार सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया। यह संसदीय मूल्यों का सीधा-सीधा उल्लंघन है।”
“जब राज्य के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज (बजट) पर चर्चा हो रही थी, तब सदन में कई मंत्री और सत्तारूढ़ दल के विधायक अनुपस्थित थे। यह जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी के अभाव को दर्शाता है।” — यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष
कांग्रेस ने सदन में मंत्रियों और विधायकों की कम उपस्थिति को भी चिंता का विषय बताया। पार्टी का मानना है कि यह दर्शाता है कि सरकार और उसके सदस्य राज्य के वित्तीय भविष्य को लेकर गंभीर नहीं हैं।
बढ़ते कर्ज और जमीन के मुद्दों पर घेरा
विपक्ष ने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सरकार ने लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तो पेश कर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कैसे कम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड पर कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इसके अलावा, विपक्ष ने सरकार पर कीमती सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने दावा किया कि विकासनगर, मसूरी और यमुना कॉलोनी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सिंचाई विभाग और अन्य सरकारी जमीनों को निजी कंपनियों को देने की तैयारी चल रही है। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो यह राज्य के संसाधनों के साथ एक बड़ा अन्याय होगा और वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
महंगाई-बेरोजगारी पर चर्चा न होने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि सरकार ने बेरोजगारी, महंगाई और पलायन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सदन में गंभीर चर्चा नहीं होने दी। उनके अनुसार, सरकार इन महत्वपूर्ण विषयों से जनता का ध्यान भटकाकर केवल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी रही। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह जनता से जुड़े इन सभी मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरना जारी रखेगी।






