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इन कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में हुआ बड़ा इजाफा, अब मिलेंगे इतने रूपए, आदेश जारी

Written by:Pooja Khodani
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वनकर्मियों को हर तीन साल में एक बार 1500 रुपये वर्दी भत्ता व हर माह 45 रुपये वर्दी धुलाई भत्ता दिया जाता है। अब वर्दी भत्ते को बढ़ाकर तीन हजार रुपये व वर्दी धुलाई भत्ते को 300 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
इन कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में हुआ बड़ा इजाफा, अब मिलेंगे इतने रूपए, आदेश जारी

Uttarakhand forest officer Uniform Allowance: उत्तराखंड वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने वन क्षेत्राधिकारियों, उप वन क्षेत्राधिकारियों, वन दरोगा, वन आरक्षी और जमादार के वर्दी भत्ते में वृद्धि की है। राज्य सरकार ने वर्दी भत्ता 1500 से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया है।इस संबंध में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने आदेश भी जारी कर दिया है।यह वृद्धि वर्ष 2011 के बाद की गई है। वृद्धि दोगुना से लेकर सात गुना तक है।

जानिए किसके भत्ते में कितना होगा इजाफा

आदेश के अनुसार, वन दरोगा, वन आरक्षी और जमादार को पहले की तरह वर्दी सिलकर दी जाएगी, जो हर तीन साल में एक बार मिलेगी । अभी इन वनकर्मियों को हर तीन साल में एक बार 1500 रुपये वर्दी भत्ता व हर माह 45 रुपये वर्दी धुलाई भत्ता दिया जाता है। अब वर्दी भत्ते को बढ़ाकर तीन हजार रुपये व वर्दी धुलाई भत्ते को 300 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। उप वन क्षेत्राधिकारी और वन क्षेत्राधिकारी को वर्दी धुलाई भत्ता 45 रुपये महीने के स्थान पर तीन 100 रुपया दिया जाएगा। दरोगा, वन आरक्षी और जमादार को वर्दी धुलाई भत्ते की दरें 30 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये मासिक की गई है।

बीते दिनों कर्मचारियों का 3 फीसदी बढ़ा था महंगाई भत्ता

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सातवें पुनरीक्षित वेतनमान में वेतन आहरित करने वाले सार्वजनिक निकायों, उपक्रमों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के हजारों अधिकारियों–कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 फीसदी बढ़ा दिया है जिसके बाद डीए की दर 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो गई है। नई दरें 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होंगी। यह बढ़ोतरी राज्य कर्मकारों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थाओं, नगर निकायों, स्थानीय निकायों तथा पूर्णकालिक एवं अंशकालिक कर्मचारियों पर भी लागू होगी।

Pooja Khodani
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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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