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धराली आपदा: मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज, जीपीआर तकनीक से कई जगह खुदाई जारी

Written by:Vijay Choudhary
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धराली में आई इस आपदा ने उत्तरकाशी में तबाही का मंजर छोड़ दिया है। रेस्क्यू टीमें जीपीआर जैसी आधुनिक तकनीक के सहारे मलबे में दबे लोगों और ढांचों को ढूंढने में जुटी हैं।
धराली आपदा: मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज, जीपीआर तकनीक से कई जगह खुदाई जारी

धराली में आपदा

उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली गांव में 5 अगस्त को आई भीषण आपदा ने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। भारी बारिश और मलबे के सैलाब ने घरों, होटलों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा के बाद से लापता लोगों की तलाश के लिए राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने आपदा प्रभावित क्षेत्र को चार सेक्टर में बांटकर खोज अभियान चलाया हुआ है, जिनमें से दो सेक्टर में एनडीआरएफ और दो में एसडीआरएफ काम कर रही है।

जीपीआर तकनीक से मिल रहे संकेत

रेस्क्यू ऑपरेशन में ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार’ (GPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक मलबे के नीचे दबे ठोस तत्वों का पता लगाने में मदद करती है। एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आईएस धपोला के मुताबिक, जीपीआर से प्राप्त संकेतों के आधार पर अनुमान है कि कई जगह मलबे के 8 से 10 फीट नीचे होटल और लोग दबे हो सकते हैं। यह उपकरण लगभग 40 मीटर की गहराई तक किसी भी ठोस वस्तु या ढांचे का पता लगा सकता है। इन संकेतों के आधार पर कई जगह खुदाई का काम जारी है।

मलबे से मवेशियों के शव मिले

आज हुई खुदाई में दो खच्चरों और एक गाय के शव मिले हैं, जिससे आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। टीमें अब उन स्थानों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जहां जीपीआर से स्पष्ट संकेत मिले हैं। मलबा हटाने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कई जगह मलबा बेहद सघन और गहरा है, जिसे हटाने में समय और भारी मशीनरी दोनों की जरूरत है।

हवाई मदद और रेस्क्यू का विस्तार

मौसम साफ होने के बाद बुधवार को सुबह 11 बजे से हेलीकॉप्टर उड़ान भर पाए। रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए धरासू और चिनियालीसोन में दो चिनूक और एक एमआई हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, जबकि एक एएलएच हेलीकॉप्टर भी पहुंच गया है। अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों को आपदा प्रभावित क्षेत्र से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि, संचार सेवाएं बुधवार को भी पूरे दिन बाधित रहीं, जिससे राहत कार्य में मुश्किलें आईं।

धराली में आई इस आपदा ने उत्तरकाशी में तबाही का मंजर छोड़ दिया है। रेस्क्यू टीमें जीपीआर जैसी आधुनिक तकनीक के सहारे मलबे में दबे लोगों और ढांचों को ढूंढने में जुटी हैं। प्रशासन और बचाव दलों का कहना है कि जब तक अंतिम व्यक्ति को सुरक्षित निकाल नहीं लिया जाता, यह अभियान जारी रहेगा। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे खुदाई और तलाश आगे बढ़ेगी, आपदा से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।