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शुरू हुआ स्पर्श हिमालय महोत्सव, किरेन रिजिजू बोले- भारत की संस्कृति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत

Written by:Neha Sharma
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देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में रविवार को तीन दिवसीय स्पर्श हिमालय महोत्सव का शुभारंभ केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने किया।
शुरू हुआ स्पर्श हिमालय महोत्सव, किरेन रिजिजू बोले- भारत की संस्कृति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत

देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में रविवार को तीन दिवसीय स्पर्श हिमालय महोत्सव का शुभारंभ केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने किया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विद्वानों और कलाकारों की उपस्थिति रही। महोत्सव का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक सहयोग को एक साझा मंच पर लाना है। उद्घाटन सत्र में देश की एकता, संविधान और संस्कृति पर केंद्रित विचार प्रस्तुत किए गए।

स्पर्श हिमालय महोत्सव पर क्या बोले किरेन रिजिजू?

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि देश के अंदर और बाहर कई ताकतें भारत को कमजोर करने की साजिशें रच रही हैं। आजादी के नाम पर कश्मीर और उत्तर-पूर्व को अलग करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि देश विरोधी शक्तियां नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे हालात भारत में पैदा करना चाहती हैं, लेकिन भारत की संस्कृति और संविधान दुनिया से अलग हैं। यही कारण है कि भारत आज भी अखंड और अडिग है।

रिजिजू ने कहा कि भारत का संविधान करीब दो वर्ष 11 माह की गहन चर्चा और विमर्श के बाद तैयार हुआ था। उन्होंने कहा कि जब सोवियत संघ जैसे बड़े देश टूट गए, तब भी भारत मजबूती से खड़ा रहा। यह हमारे संविधान, संस्कृति और विविधता में एकता की शक्ति का परिणाम है। उन्होंने इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा का अनावरण भी किया और कहा कि भारत में संस्कृति, विज्ञान और अध्यात्म का संतुलन ही देश की असली पहचान है।

आचार्य बालकृष्ण भी हुए शामिल

महोत्सव में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि में करीब 50 हजार वनस्पतियों का पूरा ब्योरा एक ग्रंथ के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि भारत का संपूर्ण और सटीक इतिहास लिखा जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सकें। उन्होंने पर्यावरण संतुलन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण की दिशा में भी काम करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी, प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने विचार साझा किए। कार्यक्रम में पद्मश्री कैलाश खेर, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, डॉ. आरुषि निशंक और विदूषी निशंक भी उपस्थित रहे। इस आयोजन में करीब 65 देशों के लेखक, विचारक, राजनीतिज्ञ और कलाकारों ने भाग लिया।

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