बिहार में मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री नितीश कुमार के कुर्सी छोड़ने की खबरों के बीच राज्य में नई सरकार बनने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि बुधवार, 15 अप्रैल को एनडीए की नई सरकार का गठन होगा। हालांकि अभी तक नए मुख्यमंत्री के नाम पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है और इसे लोकतंत्र व संविधान पर हमला बताया है।
बिहार कांग्रेस के नेता राजेश राठौड़ ने बयान जारी करते हुए कहा कि अंबेडकर जयंती के दिन बिहार में संविधान की हत्या की जा रही है। उनका आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री को हटाकर राज्य पर नया मुख्यमंत्री थोपा जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला बिहार की जनता के जनादेश का अपमान है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है।
PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी साधा निशाना
राजेश राठौड़ ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसा मुख्यमंत्री दिया जा रहा है जिसका फैसला जनता ने नहीं बल्कि दिल्ली में बैठे नेताओं ने किया है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता और संघीय ढांचे पर भी सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जिस दिन बी. आर. अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है, उसी दिन यह राजनीतिक बदलाव होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि अंबेडकर जयंती संविधान और सामाजिक न्याय के मूल्यों का प्रतीक है, लेकिन उसी दिन इस तरह का फैसला लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज
दूसरी ओर, बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हैं। मुख्यमंत्री आवास पर सुबह से ही भाजपा और जदयू के कई बड़े नेताओं की बैठकें चल रही हैं। इनमें पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, वरिष्ठ नेता ललन सिंह और विजय कुमार चौधरी जैसे नेता शामिल हैं। इन बैठकों में नए मुख्यमंत्री के चयन और कैबिनेट के गठन पर चर्चा हो रही है। इसी बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक जदयू के कई वरिष्ठ नेता Nishant Kumar को नई कैबिनेट में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें सरकार में शामिल करने से पार्टी में युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा और राजनीतिक स्थिरता का संदेश जाएगा।
हालांकि निशांत कुमार ने फिलहाल सरकार में कोई पद लेने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कैबिनेट में शामिल होने की पेशकश को स्वीकार नहीं किया और अपने फैसले पर कायम हैं। उनके इस रुख से राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।






