Hindi News

हल्द्वानी में हजारों परिवारों के विस्थापन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अप्रैल तक कोई कार्रवाई नहीं, पुनर्वास के लिए PMAY योजना लागू करने का आदेश

Written by:Gaurav Sharma
Published:
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई पर अप्रैल तक रोक लगा दी है। अदालत ने विस्थापित होने वाले पात्र परिवारों की पहचान करने और उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान देने के लिए कैंप लगाने का निर्देश दिया है। प्रभावित परिवारों को 6 महीने तक 2 हजार रुपये प्रति माह का भत्ता भी दिया जाएगा।
हल्द्वानी में हजारों परिवारों के विस्थापन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अप्रैल तक कोई कार्रवाई नहीं, पुनर्वास के लिए PMAY योजना लागू करने का आदेश

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर बसे हजारों परिवारों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। अदालत ने फिलहाल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है और कहा है कि इस मामले पर अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। तब तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यह जमीन रेलवे की है और अपील करने वाले लोग उसी जगह पर रहने की मांग नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय पहलू पर जोर देते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक विस्तृत योजना बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जो भी परिवार विस्थापन से प्रभावित होंगे, उनकी पहचान की जानी चाहिए। रेलवे और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से कहा है कि वे पात्र परिवारों को 6 महीने तक 2000 रुपये प्रति माह का भत्ता देंगे।

PMAY के तहत आवास और पुनर्वास केंद्र

अदालत ने कहा कि यह जमीन रेलवे के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, यहां से विस्थापित होने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के पात्र लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नैनीताल जिला प्रशासन वहां कैंप लगाए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि ईद के बाद, यानी 19 मार्च के बाद, एक हफ्ते का कैंप लगाया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी पात्र परिवार PMAY के फॉर्म भर सकें। इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से घर-घर जाकर लोगों को योजना के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। कोर्ट ने बनभूलपुरा में एक पुनर्वास केंद्र बनाने का भी निर्देश दिया है, जहां हर परिवार का मुखिया जा सकेगा। नैनीताल के जिलाधिकारी को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि हर पात्र परिवार को पीएम आवास मिल सके।

कोर्ट में तीखी बहस और दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस इलाके में करीब 50,000 लोग रहते हैं और रेलवे ने बिना किसी विस्तार योजना के जमीन की मांग की है। उन्होंने कहा, “एक साथ 5000 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर देना संभव नहीं है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पट्टे की जमीन है और रेलवे के पास बगल में ही खाली जमीन पड़ी है, जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

“कब्जा करने वाले थोड़े ही तय करेंगे कि आखिरी रेलवे को किस जमीन का इस्तेमाल करना है।”- CJI

इस दलील पर CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को अपनी किस जमीन का इस्तेमाल करना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हल्द्वानी उत्तराखंड में आखिरी मैदानी इलाका है जहां तक रेलवे का विस्तार हो सकता है और ट्रैक बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार पात्र लोगों को विस्थापन के बाद 6 महीने तक भत्ता देगी। कोर्ट ने साफ किया कि यह सरकार की जमीन है और अवैध कब्जा आखिरकार हटना ही चाहिए, लेकिन पुनर्वास के साथ।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews