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उत्तराखंड मुख्यमंत्री आवास पर होली कार्यक्रम आयोजित, सीएम पुष्कर सिंह धामी संग लोक कलाकारों ने जमाया रंग, पारंपरिक धुनों से गूंजा परिसर

Written by:Ankita Chourdia
Published:
उत्तराखंड में आज मुख्यमंत्री आवास पर होली मिलन कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुति दी। जौनसारी हारूल नृत्य, कुमाऊं के होली गीत और पौड़ी के राठ क्षेत्र की सांस्कृतिक टोली ने माहौल को लोक रंगों से भर दिया। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं।
उत्तराखंड मुख्यमंत्री आवास पर होली कार्यक्रम आयोजित, सीएम पुष्कर सिंह धामी संग लोक कलाकारों ने जमाया रंग, पारंपरिक धुनों से गूंजा परिसर

मुख्यमंत्री आवास में आज होली का रंग सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपराओं का जीवंत मंच बनकर सामने आया। पूर्वाह्न से ही प्रदेश के विभिन्न इलाकों से लोक कलाकारों, संस्कृति कर्मियों और होल्यारों की टोलियां होली गायन करती हुई पहुंचती रहीं। जैसे-जैसे दल आते गए, परिसर में पारंपरिक स्वरों की परतें बढ़ती गईं और कार्यक्रम सामुदायिक उत्सव का रूप लेता गया।

इस मौके पर एक ओर जौनसारी कलाकार हारूल नृत्य की लय में थे, तो दूसरी ओर कुमाऊं से आई होल्यारों की टीम अपने पारंपरिक होली गीतों के साथ अलग रंग भर रही थी। पौड़ी जिले के राठ क्षेत्र से आई सांस्कृतिक टोली ने भी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लोक गायन, नृत्य और वाद्य संगत ने पूरे आयोजन को एक साझा सांस्कृतिक मिलन में बदल दिया।

कार्यक्रम में आमजन और विशिष्ट अतिथियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। सीएम भी कलाकारों के बीच सक्रिय दिखे और लोक कलाकारों के साथ थिरकते नजर आए। इससे आयोजन का औपचारिक स्वर कम होकर सहभागिता का भाव अधिक प्रमुख रहा।

ढोल, मंजीरे और पारंपरिक धुनों से गूंजा परिसर

सीएम आवास में पारंपरिक गायन के साथ ढोल और मंजीरों की ताल लगातार सुनाई देती रही। विभिन्न लोक वाद्य यंत्रों की संगत ने होली गीतों का असर और गहरा किया। अलग-अलग क्षेत्रों की प्रस्तुतियां एक के बाद एक आईं, लेकिन उनके बीच प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सांस्कृतिक संगति दिखाई दी। यही वह बिंदु रहा जहां कार्यक्रम ने केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक निरंतरता का संकेत दिया।

“आओ दगड़ियो, नाचा गावा, आ गई रंगीली होली”- कुमाऊं से आए कलाकार

कुमाऊं की टोली के इस आह्वान के बाद राठ क्षेत्र के कलाकारों ने अपनी शैली में स्वर मिलाया और गाया, “आई डान्ड्यू बसंत, डाली मा मौल्यार”। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को क्षेत्रीय विविधता के साथ एक साझा पहचान भी दी।

सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का साझा मंच

आयोजन के दौरान यह स्पष्ट दिखा कि लोक संस्कृति का प्रभाव सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहा; जो भी वहां पहुंचा, वह इन रंगों और धुनों में शामिल होता गया। जौनसार, कुमाऊं और गढ़वाल अंचलों से आई प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विशिष्टता को एक ही स्थल पर सामने रखा।

लोक कलाकारों ने यह भी कहा कि उन्हें विशेष तौर पर आमंत्रित किए जाने से सम्मान का भाव मिला। उनके मुताबिक राज्य सरकार लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ लोक कलाकारों को संरक्षण देने की दिशा में काम कर रही है। कार्यक्रम के अंत तक यह संदेश प्रमुख रहा कि होली मिलन केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि लोक कलाओं को सार्वजनिक केंद्र में रखने का माध्यम भी है।

कलाकारों की भागीदारी पर रहा फोकस

इस आयोजन में सबसे अहम बात कलाकारों की व्यापक भागीदारी रही। पूर्वाह्न से दलों का पहुंचना, क्रमवार प्रस्तुतियां, पारंपरिक वाद्यों का उपयोग और मुख्यमंत्री की सीधी सहभागिता इन सभी तत्वों ने कार्यक्रम को सामान्य सरकारी आयोजन से अलग बनाया।

लोक कलाकारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ होली मनाते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। दिनभर चले इस सांस्कृतिक माहौल में रंग, संगीत और लोक परंपरा एक साथ दिखाई दिए, और यही इस आयोजन की मुख्य पहचान रही।

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