उत्तराखंड में यदि आपके घर, परिवार या किसी परिचित के यहां शादी-विवाह जैसा कोई शुभ समारोह है, तो अब आपको गैस आपूर्ति को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य सरकार ने ऐसे विशेष आयोजनों के लिए अस्थायी गैस कनेक्शन की एक नई और महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की है। यह घोषणा खाद्य आयुक्त आनंद स्वरूप ने अपने कार्यालय में मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था के तहत, प्रत्येक शादी समारोह के लिए दो व्यावसायिक गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह कदम उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्हें अक्सर ऐसे मौकों पर अधिक गैस की जरूरत पड़ती है।
खाद्य आयुक्त स्वरूप ने मीडिया को संबोधित करते हुए यह भी आश्वस्त किया कि राज्य में घरेलू गैस की आपूर्ति वर्तमान में लगभग सामान्य स्थिति में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस और तेल की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। यह जानकारी उन तमाम उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो त्यौहारों या बड़े पारिवारिक आयोजनों के दौरान गैस की उपलब्धता को लेकर अक्सर आशंकित रहते हैं। इस अस्थायी गैस कनेक्शन का लाभ उठाने के लिए, संबंधित परिवार को अपनी स्थानीय गैस एजेंसी में एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा।
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राज्य में अभी भी 2.68 लाख सिलेंडरों का बैकलॉग मौजूद
आपूर्ति की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए खाद्य आयुक्त ने बताया कि भले ही राज्य में घरेलू गैस के 2.68 लाख सिलेंडर का बैकलॉग अभी भी बना हुआ है, लेकिन यह आंकड़ा लगातार कम हो रहा है, जो आपूर्ति श्रृंखला में सुधार का संकेत है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य भर में हर दिन औसतन 5300 व्यावसायिक सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। इन सिलेंडरों का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अब शादी-विवाह जैसे बड़े समारोहों में किया जा सकेगा, जिससे घरेलू सिलेंडरों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा।
राज्य में अब तक 36300 घर पीएनजी नेटवर्क से जुड़े
एलपीजी पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा के स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में भी उत्तराखंड में तेजी से काम चल रहा है। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक घरों को पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) से जोड़ा जाए, ताकि एलपीजी पर पड़ने वाले दबाव को स्थायी रूप से कम किया जा सके। राज्य में अब तक 36300 घरों को पीएनजी नेटवर्क से सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है। पीएनजी, जो सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचती है, न केवल अधिक सुरक्षित है बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती है और उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बदलने की झंझट से मुक्ति दिलाती है।
पीएनजी के विस्तार में आने वाली भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी अभिनव समाधान निकाले जा रहे हैं। खाद्य आयुक्त ने बताया कि पीएनजी कनेक्शन के लिए हर जगह मुख्य पाइपलाइन से जुड़ने की आवश्यकता नहीं है। विशेष रूप से पर्वतीय जिलों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे क्षेत्रों में, जहां भूभाग कठिन होने के कारण मुख्य पाइपलाइन बिछाना व्यावहारिक नहीं होता, वहां विशेष टैंक स्थापित करके उन्हें पीएनजी से जोड़ा जा सकता है। यह तकनीक राज्य के दूरदराज और ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक भी स्वच्छ और निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी।
अप्रैल तक 1 से 1.5 लाख नए परिवारों को पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य
राज्य में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। गैस कंपनियों ने अनुमान व्यक्त किया है कि अप्रैल माह तक उत्तराखंड में एक से डेढ़ लाख अतिरिक्त परिवारों को पीएनजी नेटवर्क से सफलतापूर्वक जोड़ लिया जाएगा। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और बड़ी संख्या में परिवारों को किफायती एवं सुविधाजनक गैस आपूर्ति प्रदान करेगा। पीएनजी का यह विस्तार घरेलू एलपीजी की मांग को कम करके आपूर्ति को और अधिक स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस महत्वपूर्ण मीडिया वार्ता के दौरान, खाद्य आयुक्त आनंद स्वरूप के साथ अपर खाद्य आयुक्त पीएस पांगती भी उपस्थित थे। राज्य सरकार की यह पहल उत्तराखंड के नागरिकों को विशेष अवसरों पर गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ राज्य को एक आधुनिक और ऊर्जा-कुशल भविष्य की ओर ले जाने का एक स्पष्ट संकेत देती है, जहां हर घर तक सुविधाजनक और विश्वसनीय ऊर्जा पहुंच सकेगी।