MP में यहां जनता कर्फ्यू का असर नही, मंडी में मजदूरों से करवाया जा रहा काम

MP में यहां जनता कर्फ्यू का असर नही, मंडी में मजदूरों से करवाया जा रहा काम

अशोकनगर,मुंगावली।अलीम डायर।

एक तरफ पीएम मोदी की अपील को पूरा करने के लिए पूरा देश एकजुट हो रहा है तो वही अशोकनगर जिले के मुंगावली तहसील में प्रशासन द्वारा ही पीएम मोदी के अपील की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां जिले के मुंगावली तहसील स्थित गल्ला मंडी में मजदूरों से काम करवाया जा रहा है। वह भी बिना कोई सुरक्षा इंतजामों के।

आपको बता दें कि जहां एक और पीएम मोदी की अपील जनता कर्फ्यू पर पूरा देश एक साथ समर्थन कर रहा है है देश में हर कहीं जगह-जगह सन्नाटा पसरा हुआ है तो वहीं ऐसे में अशोकनगर जिले के मुंगावली तहसील स्थित गल्ला मंडी में पीएम मोदी की अपील की सरासर धज्जियां उड़ाई जा रही है और प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा 144 के आदेश की अवहेलना की जा रही है गल्ला मंडी के चेक पोस्ट कर्मचारी की मौजूदगी में मंडी में लगभग 30 से 40 मजदूरों द्वारा काम कराया जा रहा है अनाज की गाड़ियां भरवाई जा रही हैं वह भी बिना कोई प्रोटेक्शन सुरक्षा के इंतजामों के बिना।

जब इस संबंध में गल्ला मंडी चेक पोस्ट कर्मचारी से पूछा गया तो उसने कहा कि गल्ला मंडी के नियम कानून अलग हैं यहां के नियमानुसार काम हो रहा है।गाड़ी भरमा बहुत जरूरी है।अब इन महाशय को कौन समझाए कि आदमी की जान के आगे कोई काम जरूरी नहीं होता।इसको देखकर तो यही कहा जा सकता है कि जब प्रशासन के लोग ही पीएम की अपील को सरे से नकारते हुए प्रशासन के नियमों को ताक पर रखकर उनकी धज्जियां उड़ाएंगे तो आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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