Gajkesari Rajyog 2025: ज्योतिष शास्त्र में देवताओं के गुरू बृहस्पति और मन के कारक चन्द्रमा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। देवगुरू बृहस्पति हर 13 महीने में राशि बदलते है, जबकी चंद्रमा को सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह माना जाता हैं ,वे हर ढाई दिन में चाल बदलते हैं ,ऐसे में वे किसी ने किसी राशि के साथ मिलकर योग राजयोग का निर्माण करते है। 12 अक्टूबर को मन के कारक चन्द्रमा मिथुन राशि में गोचर करने वाले है, जहां पहले से ही ज्ञान, बुद्धि, धर्म, भाग्य और संतान के कारक गुरू विराजमान है ऐसे में ग्रहों के राजकुमार बुध की राशि में चन्द्र व गुरू की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा, जिसका प्रभाव 14 अक्टूबर तक बना रहेगा।

गजकेसरी राजयोग का राशियों पर प्रभाव

मिथुन राशि: गजकेसरी राजयोग का बनना जातकों के लिए शुभकारी साबित हो सकता है।समाज में मान सम्मान बढ़ेगा। परिवार के साथ भाग्य का साथ मिलेगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।व्यक्तित्व में निखार आएगा। दांपत्य जीनव खुशहाल रहेगा।अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते है । घर मकान खरीदने का सपना पूरा हो सकता है। घर परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होगा। अटके व रूके कामों को गति मिल सकती है।

वृषभ राशि: गजकेसरी राजयोग जातकों के लिए वरदान से कम साबित नहीं होगा। आय में जबरदस्त इजाफा हो सकता है, नए नए माध्यम खुलेंगे। अचानक से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। मार्केटिंग, मीडिया, बैंकिंग, गणित और शेयर बाजार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ हो सकता है। लंबे समय से अटके व रुके हुए कार्य पूरे हो सकते है। नौकरीपेशा को पदोन्नति, वेतनवृद्धि के अलावा नया प्रोजेक्ट मिल सकता है। सोची हुई योजनाएं सफल होंगी।

कन्या राशि: गजकेसरी राजयोग का बनना जातकों के लिए फलदायी साबित हो सकता है। करियर में तरक्की पा सकते है। कारोबार में तरक्की के साथ धनलाभ के योग बनेंगे।कारोबार का विस्तार कर सकता है, नए ऑर्डर मिलेंगे।पिता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। इस अवधि में कोई नया वाहन या घर खरीद सकते है। बेरोजगारों को नौकरी मिल सकती है।इस दौरान प्रतियोगी छात्रों को किसी परीक्षा में सफलता मिल सकती है। अटके व रूके कामों को गति मिल सकती है।

कब बनता है कुंडली में गजकेसरी राजयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गजकेसरी योग मतलब हाथी के ऊपर सवार सिंह। इस योग में चंद्रमा की युति गुरु, बुध और शुक्र के साथ होती है।अगर चंद्रमा ,गुरु, बुध और शुक्र में से किसी एक से भी केंद्र में हो तो गजकेसरी योग का निर्माण जातक की कुंडली में होता है । अगर किसी जातक की कुंडली के लग्न,चौथे और दसवें भाव में गुरु-चंद्र साथ हो तो इस योग का निर्माण होता है।यदि चंद्र या गुरु में से कोई भी एक दूसरे के साथ उच्च राशि में हो तो भी गजकेसरी योग बनता है।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)